सोमवार, 6 दिसंबर 2021

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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*दादू देखौं निज पीव को, दूसर देखौं नांहि ।*
*सबै दिसा सौं सोधि करि, पाया घट ही मांहि ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ लीलानुकरण भक्ति ॥*
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*॥ लीला देखने से भी हृदय में हरि प्रेम ॥*
लीला लख कर भी कभी, हिय में प्रगटत प्रेम । 
देख कृष्ण रति में लखा, अली भगवान् ने क्षेम ॥१९९॥
दृष्टांत कथा – अली भगवान् पहले श्रीरामजी के भक्त थे । वृन्दावन में रास के समय श्रीकृष्ण का दर्शन करके कृष्ण के ही भक्त बन गये । उनके गुरु को जब यह ज्ञात हुआ तो वे वृन्दावन आये । अली भगवान् किसी बन में चले गये थे । गुरु भी वहां ही पहुँचे, गुरुजी के भाव को जान कर के अली भगवान् बोले – 'महाराज ! मेरे गुरु और स्वामी तो आप ही हैं किन्तु श्रीकृष्ण ने बरबस मेरे मन को अपने में लगा लिया है, अब वह श्रीकृष्ण को नहीं त्याग सकता ।' गुरु ने जब सच्चा प्रेम देखा तो श्रीकृष्ण उपासना करने की आज्ञा देकर वे अपने स्थान को चले गये । इससे सूचित होता है कि कभी २ लीला देखने से भी हृदय में भगवत् प्रेम प्रगट हो जाता है ।

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