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*ज्यों ज्यों पीवै राम रस, त्यों त्यों बढै पियास ।*
*ऐसा कोई एक है, बिरला दादू दास ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ लीलानुकरण भक्ति ॥*
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*॥ लीला देखने से भी वैराग्य ॥*
लीला लख कर भी कभी, होता शीघ्र विराग ।
हुआ अमीर कबीर को, तजा भोग अनुराग ॥२०३॥
दृष्टांत कथा – अमीर कबीर मुसलमान थे । कहीं जा रहे थे, मार्ग में मथुरा वृन्दावन आया । उनका मुन्शी हिन्दू और भगवत् उपासक था । उसने अमीर कबीर को रास लीला की महिमा सुनाई । इससे उन्हें भी लीला देखने की इच्छा हुई । मुन्शी ने रास लीला करा करके अमीर कबीर को भगवत् चरित्र दिखलाये । .
श्रीकृष्ण चरित्रों को देखने से अमीर कबीर को वैराग्य हो गया । उन्होंने अपना सब धन भगवान् के चढ़ा दिया और विरक्त होकर भगवत् भजन ही करने लगे । वे ही आगे चल कर मीर माधव के नाम से प्रसिद्ध भक्त हुये । इससे सूचित होता है कि कभी २ लीला देखने से भी वैराग्य हो जाता है ।
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