सोमवार, 13 दिसंबर 2021

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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*फल पाका बेली तजी, छिटकाया मुख मांहि ।*
*सांई अपना कर लिया, सो फिर ऊगै नांहि ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ लीलानुकरण भक्ति ॥*
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*॥ कोई २ भक्त हरि लीला पर अपने प्राण भी निछावर कर देते हैं ॥*
लीला लख कोऊ भक्त तो, करत निछावर प्राण ।
संगसेन ने रास लख कीन्हा शीघ्र प्रयाण ॥२०२॥
दृष्टांत कथा – ग्वालियर के संगसेनजी कायस्थ लीला के भक्त थे । एक बार रास हो रहा था । उसे देखते २ संगसेन प्रेम से बेसुध होकर तदाकार हो गये और अपने शरीर को श्रीकृष्ण के अर्पण कर दिया । उसी समय प्राण त्याग करके नित्य विहार में जा मिले ।' इससे सूचित होता है कि कोई २ भक्त लीला देख कर भी अपने प्राण लीलाधरी पर निछावर कर देते हैं ।

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