🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*#पं०श्रीजगजीवनदासजीकीअनभैवाणी*
https://www.facebook.com/DADUVANI
*श्रद्धेय श्री महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी बाबाजी के आशीर्वाद से*
*वाणी-अर्थ सौजन्य ~ Premsakhi Goswami*
.
*२५. सबद कौ अंग ~ १/४*
.
सकल ठिकाणां२ सबद नांउ रत सार ।
कहि जगजीवनदास तहँ, उपजै अगम बिचार ॥१॥
{२. ठिकाणां-आश्रय (=आलम्बन)}
संतजगजीवन जी कहते हैं कि सबका आधार नाम स्मरण में लगे रहना है । प्रभु का नाम स्मरण ही ऐसा आधार है जहाँ से अगम अर्थात प्रभु तक पहुंच सके ऐसे विचार मिलते हैं ।
.
सबदैं आगा३ लीजिये, सबदैं पाछा४ पेलि ।
जगजीवन सबदैं मिलै, सबद ही मांहीं खेलि ॥२॥
(३. आगा=आदि भाग) (४. पाचा=अन्तिम या पृष्ट भाग)
संतजगजीवन जी प्रभु नाम शब्द की महिमा बताते हुए कह रहै हैं कि शब्द ही पथ प्रदर्शक हो शब्द ही पीछे से आगे बढाने वाला हो । संत कहते हैं कि सारा क्रिया व्यवहार ही शब्द का है । सब अन्त में शब्द में ही जा मिलते हैं ।
.
जे तू मांनै तो कहूँ, सबद एक सुंणि सार ।
रांम नांम जिन बीसरै, जगजीवन इंहिं बार ॥३॥
संतजगजीवन जी कहते हैं कि हे जीव यदि तुम मानों तो मैं एक बात कहूँ सुनने योग्य एक ही शब्द है वह है राम नाम इसे कभी मत भूलना ।
.
नाद निरंजन ब्रह्म सुत, पूत पिता मंहि बास ।
सोहं सबद सोई पलटि, सु कहि जगजीवनदास ॥४॥
संतजगजीवन जी कहते हैं कि जिस नाम से ब्रह्म पुत्र भी विकार रहित हो ब्रह्म होते हो, उन्हें ब्रह्म का स्थान मिले वह सोहं नाद ही ऐसा शब्द है जो ये सम्भव कर सकता है । इसमें चारों ऋषि जन जिनमें से दादू जी भी अवतरित हुये है, को भी ब्रह्मा पुत्र कहा गया है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें