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*दादू जतन जतन करि राखिये, दिढ़ गहि आतम मूल ।*
*दूजा दृष्टि न देखिये, सब ही सैंबल फूल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
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*परिच्छेद १०९ ~ भक्तों के प्रति उपदेश*
*(१)राखाल, भवनाथ, नरेन्द्र, बाबूराम*
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श्रीरामकृष्ण भक्तों के साथ आनन्दपूर्वक बैठे हुए हैं । बाबूराम, छोटे नरेन्द्र, पल्टू, हरिपद, मोहिनीमोहन आदि भक्त जमीन पर बैठे हुए हैं । एक ब्राह्मण युवक दो-तीन दिन से श्रीरामकृष्ण के पास हैं, वे भी बैठे हुए हैं । आज शनिवार है, ७ मार्च १८८५ दिन के तीन बजे का समय होगा । चैत की कृष्णा सप्तमी है ।
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श्रीमाताजी* भी आजकल नौबतखाने में रहती हैं । श्रीरामकृष्ण की सेवा के लिए वे कभी कभी यहाँ आया करती हैं । मोहिनीमोहन के साथ उनकी स्त्री और नवीनबाबू की माँ, गाड़ी पर आयी हुई हैं । (*श्रीशारदादेवी – श्रीरामकृष्ण की लीलासहधर्मिणी)
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औरतें नौबतखाने में श्रीरामकृष्ण के दर्शन कर वहीं पर रह गयीं । भक्तों के जरा हट जाने पर वे आकर श्रीरामकृष्ण को प्रणाम करेंगी । श्रीरामकृष्ण छोटे तखत पर बैठे हुए भक्त बालकों को देख रहे हैं और आनन्द में मग्न हो रहे हैं ।
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राखाल इस समय दक्षिणेश्वर में नहीं रहते । कुछ महीने बलराम के साथ वृन्दावन में थे; वहाँ से लौटकर इस समय घर पर रहते हैं ।
श्रीरामकृष्ण (सहास्य) - राखाल इस समय पेन्शन ले रहा है । वृन्दावन से लौटकर घर पर रहता है । घर में उसकी स्त्री है । परन्तु उसने कहा है, 'हजार रुपया तनख्वाह देने पर भी नौकरी न करूंगा ।’
"यहाँ लेटा हुआ कहता था, तुम्हारी भी संगत अब अच्छी नहीं लगती उसकी ऐसी एक अवस्था हुई थी ।
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"भवनाथ ने विवाह किया है, परन्तु रात भर स्त्री के साथ धर्म की ही चर्चा करता है । दोनों ईश्वरी प्रसंग लेकर रहते हैं । मैंने कहा, 'अपनी स्त्री से कुछ आमोद-प्रमोद भी किया कर', तब गुस्से में आकर उसने कहा था, 'क्या ! हम लोग भी आमोद-प्रमोद लेकर रहेंगे ?"
श्रीरामकृष्ण अब नरेन्द्र के बारे में कह रहे हैं ।
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श्रीरामकृष्ण (भक्तों से) - परन्तु नरेन्द्र के लिए मुझे जितनी व्याकुलता हुई थी, उतनी उसके(छोटे नरेन्द्र के) लिए नहीं हुई ।
(हरिपद से) - "क्या तू गिरीश घोष के यहाँ जाया करता है ?"
हरिपद - हमारे घर के पास ही उनका घर है । प्रायः जाया करता हूँ ।
श्रीरामकृष्ण - क्या नरेन्द्र भी जाता है ?
हरिपद - हाँ, कभी कभी तो देखता हूँ ।
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श्रीरामकृष्ण - गिरीश जो कुछ (मेरे अवतारत्व के सम्बन्ध में) कहता है, उस पर उसकी क्या राय है ?
हरिपद - नरेन्द्र तर्क में हार गये हैं ।
श्रीरामकृष्ण - नहीं, उसने(नरेन्द्र ने) कहा, 'गिरीश घोष को जब इतना विश्वास है, तो उस पर मैं कुछ क्यों कहूँ ?'
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जज अनुकूल मुखोपाध्याय के जामाता के भाई आये हुए हैं ।
श्रीरामकृष्ण - तुम नरेन्द्र को जानते हो ?
जामाता के भाई - जी हाँ, नरेन्द्र बुद्धिमान लड़का है ।
श्रीरामकृष्ण (भक्तों से) - ये अच्छे आदमी हैं, जब इन्होंने नरेन्द्र की तारीफ की । उस दिन नरेन्द्र आया था । त्रैलोक्य के साथ उस दिन उसने गाया भी; परन्तु उस दिन का गाना अलोना लगा ।
(क्रमशः)

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