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*दादू अंतर आत्मा, पीवै हरि जल नीर ।*
*सौंज सकल ले उद्धरै, निर्मल होइ शरीर ॥*
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*श्री रज्जबवाणी पद ~ भाग २*
राग गौड़ी । (गायन समय २ से ६ दिन में)
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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५३ राम रसपान - प्रेरणा । दीपचन्दी
राम रस पीजिये रे, पीये सब सुख होय ।
पीवत ही पातक कटैं, सब संतन दिशि जोय ॥टेक॥
निशि दिन सुमिरण कीजिये, तन मन प्राण समोय१ ।
जन्म सफल सांई मिलै, जिव जपि साध२ हु दोय ॥१॥
सकल पतित पावन किये, जे लागे लै३ लोय४ ।
अति उज्जल अघ ऊतरै, किलविष५ राले६ धोय ॥२॥
इहिं रस रसिया सब सुखी, दुखी न सुनिये कोय ।
जन रज्जब रस पीजिये, संतों पीया सोय ॥३॥६॥
राम भक्ति रस पीने की प्रेरणा कर रहे हैं -
✦ राम भक्ति रस का पान करो, इसके पीने से सब प्रकार आनन्द ही होता है । पीते ही पाप कट जाते हैं । सब संतों की और देखकर भी अपने तन मन प्राण को प्रभु में लगाकर१ रात्रि दिन स्मरण ही करना चाहिये ।
✦ प्रभु स्मरण से एक तो जन्म सफल हो जाता है, दूसरे प्रभु प्राप्त हो जाते हैं अत: भगवान का नाम जप करके दोनो काम सिद्ध२ करो ।
✦ जो पापी लोग४ अपनी वृत्ति३ लगाकर प्रभु स्मरण में लगे हैं, उन सभी को प्रभु ने पवित्र किया है । राम भक्ति से पाप हट कर प्राणी का हृदय अति उज्जल हो जाता है । यह स्मरण सभी दोषों५ को धो डालता६ है ।
✦ इस रस के रसिया सभी सुखी हैं, कोई भी दु:खी नहीं सुना जाता । जिस राम भक्ति रस को संतों ने पान किया है, उसी रस का पान करो । अन्य विषय रस में दुखद होते हैं ।
(क्रमशः)

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