🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 *सत्यराम सा* 卐 🙏🌷
🌷🙏 *#श्री०रज्जबवाणी* 🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*आत्म बोध बँझ का बेटा, गुरु मुखि उपजै आइ ।*
*दादू पंगुल पंच बिन, जहाँ राम तहँ जाइ ॥*
===================
*श्री रज्जबवाणी पद ~ भाग २*
राग गौड़ी । (गायन समय २ से ६ दिन में)
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
५० आन्तर साधना । धीमा ताल
इहिं परदे परदे सब जांहि,
गुरु प्रसाद परम पद मांहि ॥टेक॥
चाहि चखिन१ चश्मा गुरु दीजे,
तब दयालु का दर्शन कीजे ॥१॥
शब्द सलिल२ में नैन निहारै,
इहिं लक्षण रावण मन मानै ॥२॥
अधिक अहार अजीर्ण होय,
बूंटी बैन३ जरै पुनि सोय ॥३॥
रज्जब जलन जरे की जाई,
ज्ञान अग्नि जे सेकै आई ॥४॥३॥
आन्तर साधना का लाभ बता रहे हैं -
✦ सर्व अज्ञानी प्राणी इस अज्ञान के पड़दे ही पड़दे में रहने से संसार में भ्रमण करने को जा रहे हैं । कोई विरले ही गुरु के कृपा प्रसाद से परमपद में प्रवेश करते हैं अथवा इस आन्तर साधना रूप पड़दे ही पड़दे में जो गमन करते हैं अर्थात बाहर आडम्बर नहीं करके भीतर हृदय में ही प्रभु प्राप्ति का साधन करते हैं, वे सभी गुरु के कृपा प्रसाद से परम पद में प्रवेश करते हैं अर्थात परमपद को प्राप्त करते हैं ।
✦ अपनी इच्छा रूप नेत्रों१ पर गुरु का ज्ञान रूप ऐनक लगाओगे तब ही दयालु प्रभू का दर्शन कर सकोगे ।
✦ जैसे जल२ के भीतर नेत्र खोल कर देखा जाता है तब जल ही जल दीखता है । इस सर्वत्र ब्रह्म दर्शन रूप लक्षण से ही मन रूप रावण मारा जाता है ।
✦ जैसे अधिक भोजन करने से अजीर्ण हो जाता है, तब पाचक बूंटी से वह पच जाता है, वैसै ही किसी प्रकार की अधिकता का अभिमान हो जाता है, वह भी संत वचनों३ के विचार से नष्ट हो जाते हैं ।
✦ जो काम क्रोधादि की जलन हृदय में होती है वह गुरु के पास आकर ज्ञानाग्नि से सेकने से मिट जाती है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें