शनिवार, 6 अगस्त 2022

*साधु संगति गुरु-धर्म*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*पहली न्यारा मन करै, पीछै सहज शरीर ।*
*दादू हंस विचार सौं, न्यारा किया नीर ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ सारग्राही का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*छप्पय-*
*विष्णु-स्वामि पुर-सारि१ मधि, लाहौरी लाहो लियो ॥*
*नाम नरायणदास, मिश्र मिश्रित धर्म भाख्यो ।*
*भक्ति भेद२ भागवत, सार शुक मुनि ज्यों जाख्यो ।*
*व्यास-वचन विस्तार, कही गद-गद हो वाणी ।*
*साधु संगति गुरु-धर्म, अनन्त प्रबोधे प्राणी ॥*
*राघव नाथ कृपा भई, क्षीर-नीर निर्णय किया।*
*विष्णु-स्वामि पुर-सारि मधि, लाहौरी लाहो लियो ॥२३५॥*
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नारायणदासजी मिश्र ने राधाकृष्ण की मिश्रित भक्ति रूप धर्म का कथन किया है। आपने भक्ति का रहस्य२ अच्छी प्रकार प्राप्त किया था और श्रीमद्भागवत् के सार रस का आस्वादन तो श्रीशुकदेवजी के समान किया था।
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व्यास के वचन श्रीमद्भागवत् का विस्तार आपने गद्गद वाणी होकर किया था। अच्छी प्रकार साधु संगति की थी और गुरु धर्म का पालन करते हुये अनन्त प्राणियों को उपदेश दिया था।
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श्रीनाथ भगवान् कृष्ण ने उन पर कृपा की थी तब ही तो उनने हंस ने के समान क्षीर नीर अलग करके क्षीर ग्रहण करने की उचित चरितार्थ की थी अर्थात् सत्यासत्य को अलग करके सत्य को ही ग्रहण किया था। इस प्रकार विष्णुस्वामीजी की संप्रदाय१ में नारायणदासजी मिश्र लाहौरी ने भगवत् तत्व को प्राप्त किया था ॥२३५॥
(क्रमशः)

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