रविवार, 14 अगस्त 2022

*गुह्य बातें*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीरामकृष्ण०वचनामृत* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*तुम हरि हिरदै हेत सौं, प्रगटहु परमानन्द ।*
*दादू देखै नैन भर, तब केता होइ आनन्द ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ निष्काम पतिव्रता का अंग)*
===============
साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
.
*(४)गुह्य बातें*
दिन का पिछला पहर हो गया । श्रीरामकृष्ण पंचवटी गये हुए हैं । मास्टर से विनोद की बातें पूछते हैं । विनोद मास्टर के स्कूल में पढ़ते हैं । ईश्वर का चिन्तन करते हुए कभी-कभी विनोद को भावावेश हो जाता है । इसीलिए श्रीरामकृष्ण उन्हें प्यार करते हैं ।
.
अब श्रीरामकृष्ण मास्टर से बातचीत करते हुए कमरे की ओर लौट रहे हैं । बकुलतल्ले के घाट के पास आकर उन्होंने कहा, “अच्छा, यह जो कोई कोई(मुझे) अवतार कहते हैं, इस पर तुम्हारा क्या विचार है ?"
.
बातचीत करते हुए श्रीरामकृष्ण अपने कमरे में आ गये । चट्टी उतारकर उसी छोटे तखत पर बैठ गये । तखत के पूर्व की ओर एक पाँवपोश रखा हुआ है । मास्टर उसी पर बैठे हुए बातचीत कर रहे हैं । श्रीरामकृष्ण ने वही बात फिर पूछी । दूसरे भक्त कुछ दूर बैठे हुए हैं । ये सब बातें उनकी समझ में नहीं आयीं ।
.
श्रीरामकृष्ण - तुम क्या कहते हो ?
मास्टर - जी, मुझे भी यही जान पड़ता है, जैसे चैतन्यदेव थे ।
श्रीरामकृष्ण - पूर्ण या अंश या कला ? - तौल कहो न ।
मास्टर - जी, तौल मेरी समझ में नहीं आती । इतना कह सकता हूँ, भगवान् की शक्ति अवतीर्ण हुई है । वे तो आप में हैं ही ।
श्रीरामकृष्ण - हाँ, चैतन्यदेव ने शक्ति के लिए प्रार्थना की थी ।
श्रीरामकृष्ण कुछ देर चुप रहे । फिर कहा, "परन्तु वे षड्भुज हुए थे ।"
.
मास्टर सोच रहे हैं, चैतन्यदेव को षड्भुज रूप में उनके भक्तों ने देखा था जरूर, परन्तु श्रीरामकृष्ण ने किस उद्देश्य से इसका उल्लेख किया ?
भक्तगण पास ही कमरे में बैठे हुए हैं । नरेन्द्र विचार कर रहे हैं । राम (दत्त) बीमारी से उठकर ही आये हैं, वे भी नरेन्द्र के साथ घोर तर्क कर रहे हैं । श्रीरामकृष्ण देख रहे हैं ।
.
श्रीरामकृष्ण (मास्टर से) - मुझे ये सब विचार अच्छे नहीं लगते । (राम से) बन्द करो - एक तो तुम बीमार थे । अच्छा, धीरे-धीरे (मास्टर से) मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता । मैं रोता था और कहता था, 'माँ, एक कहता है - ऐसा नहीं, ऐसा है; दूसरा कुछ और बतलाता है । सत्य क्या है, तू मुझे बतला दे ।'
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें