सोमवार, 2 जनवरी 2023

*आप कहावत राम सहाई*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*दादू बिना राम कहीं को नांही, फिरि हो देश विदेशा ।*
*दूजी दहन दूर कर बौरे, सुनि यहु साधु संदेशा ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*दोय सुता इक धाम न व्याहत,*
*एक सुता तज के पति आई।*
*गायन१ दोय फिरै पुर गावत,*
*पावत नांहिं कछू दुख पाई ॥*
*कोई बतावत आय रु गावत,*
*आप कहावत राम सहाई।*
*जो हरि चावहु बाल मुंडावहु,*
*लाल लडावहु यूं मन भाई ॥२९७॥*
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नरसीजी के दो पुत्री थीं एक का नाम “कुँवरसेना" और दूसरी का "रतनसेना” था। रतनसेना हरि भक्ति में लैलीन होकर घर में ही रह गई थी, उसने विवाह नहीं किया था। बड़ी कुँवरसेना भी अपने पति को छोड़कर नरसीजी के साथ जूनागढ़ में आ गई थी।
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जूनागढ़ में कोई सामान्य जाति की दो गानेवाली१ स्त्रियाँ आईं थी। वे गायन करती हुई पुर में अनेक स्थानों में फिरती रहीं किन्तु उनको कहीं भी कुछ भी नहीं मिला। तब वे बड़ी दुखी हुई।
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किसी ने कहा- नरसीजी के यहाँ जाकर गाओ। वे आकर गाने लगीं। नरसीजी ने उनको समझाकर कहा- यहाँ कुछ नहीं मिलेगा। हमारे तो राम ही सहायक हैं। हम तो उन की ही भक्ति करते हैं।
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यदि तुम भी हरि को चाहो तो, केश मुंडवा कर विरक्त हो जाओ और प्रेमपूर्वक हरि का यश गान करते हुए भगवान् को लडाओ। उन दोनों के मन को भी नरसीजी का ऐसा कथन प्रिय लगा। फिर उन दोनों ने वैसा ही किया। नरसीजी के यहाँ ही रह कर प्रभु-प्रेम रस पान करने लगी।
(क्रमशः)

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