🌷🙏 卐 *सत्यराम सा* 卐 🙏🌷
🌷🙏 *#संतटीलापदावली* 🙏🌷
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*जहँ तहँ विषय विकार तैं, तुम ही राखणहार ।*
*तन मन तुम को सौंपिया, साचा सिरजनहार ॥*
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*संत टीला पदावली*
*संपादक ~ ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी*
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यहु मन म्हारौ बरजौ१ रांम ।
भजन बिनां मेटहु सब कांम ॥टेक॥
त्रिस्नां मेटहु तजै बिकार ।
तौ जीव चलै तुम्हारी लार ॥
गुण मेटहु गोब्यंद२ गुण गावै ।
सन्त३ संगति माहैं सुख पावै ॥
गुर दादू के सरणैं आयौ ।
टीलौ मनि जी बहुत संतायौ ॥१५॥
(पाठान्तर : १. बरिजौ, २. गोविन्द, ३. सत)
हे रामजी ! विषय-भोगों में रमते हुए मेरे मन को रोक दो । आपके भजन के अतिरिक्त अन्य सब कामनाओं को विनष्ट कर दो ।
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मन में विद्यमान त्रिष्णाओं को समूलतः नष्ट कर दो ताकि मेरा मन विषय-विकारों को सर्वथा त्याग दे और मेरा मन तुम्हारे पीछे-पीछे चलता रहे ।
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हे गोविन्द ! त्रिगुणों के प्रभाव को नष्ट कर दो ताकि मैं आपके गुणों का गायन अहर्निश कर सकूँ और मेरा मन सन्तों को संगति में सुख मिलता है, अनुभव करने लग जाए ।
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टीला कहता है, इस मन ने मुझे बहुत सताया है । इसी कारण मैं दादूजी महाराज जैसे गुरु की शरण में आया हूँ ॥१५॥
(क्रमशः)

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