शनिवार, 21 जनवरी 2023

*श्री रज्जबवाणी पद ~ १०६*

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*दादू साहिब कसै सेवक खरा, सेवक को सुख होइ ।*
*साहिब करै सो सब भला, बुरा न कहिये कोइ ॥*
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*श्री रज्जबवाणी पद ~ भाग २*
राग टोडी । (गायन दिन ६ से १२)
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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१०६ परीक्षा । त्रिताल
प्राण परख बिन खोटा५ खाही,
अकलि१ आँख दिब२ दृष्टि सु नांही ॥टेक॥
प्रथम परख बिना अंध अज्ञानी,
ता परि ठगन ठगाई ठानी ॥१॥
परख बिना पति पंथ भुलाना,
परख बिना मन मूल न जाना ॥२॥
पारख बिना मनोरथ लीन्हे३,
पारख बिना भेष बहु कीन्हे ॥३॥
पारख बिना तीरथों न्हावे,
परख बिन बहु देह दहावे४ ॥४॥
पारख बिन सु कष्टैं काया,
परख बिना तेतीस मनाया ॥५॥
पारख बिना अवतार अराधैं,
परख बिना कांकर कँठ बाँधै ॥६॥
परख बिना बैकुंठ विश्वासा,
परख बिन रिधि सिधि की आशा ॥७॥
पारख बिन सोई प्राण अनाथा,
रज्जब परख परम धन हाथा ॥८॥२३॥
परीक्षा बिना हानि होती है, यह कह रहे हैं -
✦ परीक्षा बिना प्राणी धोखा५ खा जाता है । परीक्षा बिना बुद्धि१ नेत्र, और दिव्य दृष्टि प्राप्त नहीं होती ।
✦ पहले परीक्षा बिना अज्ञानी अंधा ही होता है । उस अज्ञानी पर ठग लोग ठगाई का व्यवहार करने लगते हैं अर्थात उसे ठगते हैं ।
✦ परीक्षा बिना प्राणी परम पति प्रभु का मार्ग भूला हुआ है । परीक्षा बिना मन अपने मूल प्रभु को नहीं जान पाता ।
✦ परीक्षा बिना व्यर्थ के मनोरथों में लीन३ रहता है । बिना परीक्षा बहुत से भेष बनाते हैं ।
✦ परीक्षा बिना ही तीर्थो में जाकर स्नान करते हैं । परीक्षा बिना ही बहुत से धूणी तापते हुये शरीर को जलाते४ हैं ।
✦ परीक्षा बिना ही शरीर को नाना कष्ट देते हैं, परीक्षा बिना ही तेतीस देवताओं को इष्ट रूप से मानते हैं ।
✦ परीक्षा बिना ही अर्थात प्रभु के स्वरूप को पहचाने बिना ही अवतारों की परमात्मा रूप से आराधना करते हैं । परीक्षा बिना ही शालिग्राम आदि कंकर कंठ में बाधते हैं ।
✦ परीक्षा बिना ही बैकुण्ठ का विश्वास करते हैं । परीक्षा बिना ही ॠद्धि सिद्धि की आशा करते हैं ।
✦ जो परीक्षा नहीं जानता वह प्राणी अनाथ है । हमें परीक्षा से ही परमात्मा रूप रूप ही धन प्राप्त हुआ है ।
इति श्री रज्जब गिरार्थ प्रकाशिका सहित टोडी राग ५ समाप्त: ॥
(क्रमशः)

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