सोमवार, 23 जनवरी 2023

*देत तिलक्क हि देख लुभायो*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*अपना अपना कर लिया, भंजन माँही बाहि ।*
*दादू एकै कूप जल, मन का भ्रम उठाहि ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साच का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*ब्राह्मण हेरत डोल भलो वर,*
*पायो नहिं नरसी हु बताओ।*
*बूझत आय सुपुत्र दिखावत,*
*देत तिलक्क हि देख लुभायो ॥*
*नांहिं बरोबर हो सब से वर,*
*वेगि गयो द्विज नाम जनायो ।*
*शीश धुनै सुन ताल कुटा भन,*
*बोरि सुता फिर जाहु कहायो ॥३०५॥*
बड़नगर के मदन महता धनी ब्राह्मण की कन्या जुठीबाई(सुरसेना) के लिये वर देखने को उसका पुरोहित ब्राह्मण खोजता हुआ जूनागढ़ में आया। बहुत से घरों में लड़के देखे किन्तु उसको कोई भी अच्छा न लगा। किसी ने कहा- "नरसी का पुत्र बहुत सुन्दर है।
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उसने आकर नरसी से पूछा। नरसीजी ने अपने पुत्र शामलदास को दिखा दिया। नरसीजी के पुत्र को देखते ही ब्राह्मण मोहित हो गया और तत्काल नरसीजी के पुत्र के तिलक कर दिया।
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नरसीजी ने कहा- " कन्या के पिता धनी हैं, मैं उनके समान नहीं हूँ।" पुरोहित ने कहा-"आप सबसे श्रेष्ठ हैं।" तिलक करके पुरोहित अतिशीघ्रता से आये और कन्या के पिता को नाम बताया। "मैं नरसीजी के पुत्र को तिलक "दे आया हूँ।"
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सुनते ही कन्या का पिता दुःखी हो मस्तक पर हाथ मार कर बोला- "वह तो ताल- कुटा है। मेरी कन्या को तो तुमने डुबो दिया। मुझे इससे बड़ा ही दुःख हुआ है।" फिर कहा- "आप पुनः जाकर तिलक फेर लाओ।"
(क्रमशः)

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