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*नाँव रे नाँव रे, नाँव रे नाँव रे,*
*सकल शिरोमणि नाँव रे, मै बलिहारी जाँव रे ॥टेक॥*
*दुस्तर तारै, पार उतारै, नरक निवारै नाँव रे ॥१॥*
*तारणहारा, भवजल पारा, निरमल सारा नाँव रे ॥२॥*
*नूर दिखावै, तेज मिलावै, ज्योति जगावै नाँव रे ॥३॥*
*सब कुछ दाता, अमृत राता, दादू माता नाँव रे ॥४॥*
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*श्री रज्जबवाणी पद ~ भाग २*
राग केदार ८(संध्या ६ से ९ रात्रि)
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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१२५ । धीमाताल
ऐसा तेरा नाम बहु गुणवंत,
सकल विधि प्रतिपाल प्राणन१, जप निवाजे२ जंत३ ॥टेक॥
शेष शंकर विषणु ब्रह्मा, ररंकार रटंत ।
सुरन सत सुमिरण बतायॊ, भाग्य प्रभूत४ करंत ॥१॥
हरि अराधसु हरत पापन, आतमा उधरंत ।
गिनूं केते ज्ञानि नाम हि, सृष्टि साधू संत ॥२॥
आदि अंत रु मध्य मानुष, नाम नाव चढंत ।
जाहि जल निधि उतरि आतम, नीच ऊंच अनंत ॥३॥
सकल विधि सुखराशि सुमिरण, अमित काज सरंत ।
रज्जबा क्या कहै महिमा, भजन बधि५ भगवंत ॥४॥६॥
✦ प्रभो ! आपका नाम ऐसा है - बहुत गुणों से युक्त है, सब प्रकार प्राणियों१ का रक्षक है । नाम जपने वाले जीव३ पर आप कृपा२ करते हैं ।
✦ शेष शंकर विष्णु और ब्रह्मा भी राम के बीज मंत्र 'राँ' का जाप करते हैं । देवताओं ने भी नाम स्मरण को सच्चा साधन बताया है । नाम जप प्राणी के भाग्य को विशाल४ बना देता है ।
✦ नाम जप द्वारा हरि की आराधना करने से पाप नष्ट होकर जीवात्मा का उद्धार होता है, इस सृष्टि मे बहुत से ज्ञानी साधु संत तथा कितनेक का नाम गिनाऊं ।
✦ सृष्टि के आदि, मध्य अंत तक मनुष्य संसार सागर को पार करने के लिये नाम रूप नौका पर ही चढे हैं । नाम नीच ऊंच अनन्त जीवात्मा संसार सागर से पार उतर जाते हैं ।
✦ नाम स्मरण सब प्रकार सुख की राशि है । नाम स्मरण से अनन्त कार्य सिद्ध होता है । मैं नाम की महिमा क्या कहूं, नाम का भजन तो भगवान से भी बढकर५ है ।
(क्रमशः)

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