बुधवार, 22 मार्च 2023

निरंजन राषि लीजै हो

🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 *सत्यराम सा* 卐 🙏🌷
🌷🙏 *#संतटीलापदावली* 🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*काया माया ह्वै रही, जोधा बहु बलवंत ।*
*दादू दुस्तर क्यों तिरै, काया लोक अनंत ॥*
.
*संत टीला पदावली*
*संपादक ~ ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी*
===========
राग मारू ॥६॥
निरंजन राषि लीजै हो१ ।
सेवग मांहै चूक व्है तौ, नांषि न दीजै हो ॥टेक॥
यहु घट काचा चाम का, मांहै जिव आया हो ।
साहिब कूं२ जाणैं नहीं, भारी दुष पाया हो ॥
गुण हीं सूं गहि बंधिया, कहि कौंण छुड़ावै हो ।
दसूं३ दिसा कूँ३ फेरिये, क्यूं तुम्ह पैं आवै हो ॥
साहिब सेती बीनती, अबकै चिति धारौ हो ।
गुर दादू परसाद थैं५, टीलौ निस्तारी हो ॥३६॥
(पाठान्तर : १. हो के स्थान पर ‘रे’ है, २. कौं, ३. दसौं, ४. कौं, ५. तैं)
.
विनती करते हुए कहते हैं, हे निरंजन-निराकार-परात्पर-परब्रह्म-परमात्मा ! मुझ शरणागत को अपनी शरण में रख लेना । यदि मुझ सेवक में कोई कमी भी हो तब भी मुझको त्याग मत देना; अपना लेना ॥टेक॥
.
यह घट रूपी शरीर कच्चा=मरणधर्मा है । इसके ऊपर चमड़ी का खोल है और भीतर जीव निवास करता है । यह विषय भोगों में रत रहने से साहिब=तुझको जानता नहीं=भजता नहीं है । परिणामस्वरूप भारी दुःख पाता है ।
.
तीनों गुणों को पकड़कर उन्हीं से बँध गया है । बताइए, अब इन त्रिगुणों से इसको कौन छुड़ाये । यदि इसको दशों दिशाओं=सर्वत्र से हटाया जाए तभी तुम्हारी शरण में आ सकता है ।
.
हे साहिब ! आपसे विनती है कि अबकी बार मेरी विनती को स्वीकार कर लो । गुरुमहाराज दादूजी की कृपा से अबकी बार टीला का निस्तार=उद्धार कर दो ॥३६॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें