शनिवार, 15 अप्रैल 2023

*माधवदासजी*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू राम रसायन भर धर्या, साधुन शब्द मंझार ।*
*कोई पारखि पीवै प्रीति सौं, समझै शब्द विचार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शब्द का अंग)*
==========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*माधवदासजी*
*छप्पय-*
*व्यास द्विती१ माधव प्रकट, सबको भलो विचारियो ॥*
*श्रुति स्मृति अरु पुराण, अगम भारत मथ लीया ।*
*ग्रंथ सबै पुनि देख, अर्थ रस भाषा कीया ॥*
*गाई लीला जैति, कृत में जै जै उचरयो ।*
*श्रवना सुन करि कंठ, जीव जग निर्भय विचरयो ॥*
*निर्वेद२ अवधि शिर जगन्नाथ, रस करुणा उर धारियो ।*
*व्यास द्विती माधव प्रकट, सबको भला विचारियो ॥२५७॥*
.
माधवदासजी मानो दूसरे१ व्यास ही प्रकट हुए थे। आपने सबकी भलाई का ही विचार किया था। जैसे पहले व्यासजी ने वेद विभाग, १८ पुराण और महाभारत की रचना की, फिर सबको मथकर हरियशमय श्रीमद्भागवत निकाला ...
.
वैसे ही अब माधवदास होकर श्रुति, स्मृति, पुराण और दुर्गम अर्थ वाले महाभारत को मथकर और सर्व ग्रंथों को देखकर तथा उनका अर्थ रूप रस निकाल के भाषा ग्रंथ किया ।
.
आपने लीला जैति ग्रंथ रचा, उसकी रचना में जय जयकार शब्द युक्त भगवत् लीला का गान किया है। जिसको श्रवणों से सुनकर तथा कंठस्थ करके जीव जगत् में निर्भय होकर विचरता है।
.
आप वैराग्य२ की तो अवधि ही थे अर्थात् आपके हृदय में पूर्ण वैराग्य था। आप अपने शिर पर जगन्नाथजी को ही इष्ट देव मानते थे। आपने अपने हृदय में विशेष रूप से करुणा रस को हो धारण किया था ॥२५७॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें