शुक्रवार, 21 अप्रैल 2023

*देख प्रसाद बड़े मन मोदत*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*दादू हौं बलिहारी सुरति की, सबकी करै सँभाल ।*
*कीड़ी कुंजर पलक में, करता है प्रतिपाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*तीन दिना सु भये रु नहीं क्षुत१,*
*लीन रहा हरि सोच परयो है।*
*शैन२ सुभोग पठात३ भये,*
*कमला कर हाटक४ थार धर्यो है ॥*
*बैठ कुटी मधि पीठ दिई मग,*
*दामिनि सी दमकी सु फिर्यो है।*
*देख प्रसाद बड़े मन मोदत,*
*मानत भाग्य सु पात्र पर्यो है ॥३२५॥*
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तीन दिन हो गये किन्तु आपको भूख१ ने नहीं सताया। एकमात्र हरि स्मरण में ही आपका मन लीन रहा। यह दशा देखकर श्रीजगन्नाथ जी को विचार आया कि मेरा भक्त तीन दिन से भूखा पड़ा है।
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फिर जो स्वर्णथाल में शयन२ - भोग धरा था, सो प्रसाद करके लक्ष्मी जी के हाथ भेजा३ । लक्ष्मीजी ने थाल रखा था तब इनको बिजली सी चमकती ज्ञात हुई थी किन्तु दर्शन नहीं हुआ था।
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फिर आपने मुख फेरा तो महा प्रसाद देख कर मन में बड़े आनन्दित हुए और अपना बड़ा भाग्य मानकर प्रसाद पाया फिर उस थाल को वहाँ ही रख दिया।
(क्रमशः)

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