गुरुवार, 13 अप्रैल 2023

शब्दस्कन्ध ~ पद #३१७

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज, व्याकरण वेदांताचार्य, श्रीदादू द्वारा बगड़, झुंझुनूं ।
साभार : महामण्डलेश्वर स्वामीअर्जुनदास जी महाराज, बगड़, झुंझुनूं ।
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
*(#श्रीदादूवाणी शब्दस्कन्ध ~ पद #३१७)*
*राग सोरठ ॥१९॥**(गायन समय रात्रि ९ से १२)*
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*३१७. विरह (त्रिताल)*
*आओ राम दया कर मेरे,*
*बार बार बलिहारी तेरे ॥टेक॥*
*विरहनी आतुर पंथ निहारै,*
*राम नाम कह पीव पुकारै ॥१॥*
*पंथी बूझै मारग जोवै,*
*नैन नीर जल भर भर रोवै ॥२॥*
*निशदिन तलफै रहै उदास,*
*आतम राम तुम्हारे पास ॥३॥*
*वपु विसरे तन की सुधि नांही,*
*दादू विरहनी मृतक मांही ॥४॥*
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हे राम ! मैं वियोगिनी आपके चरणों में बार-बार नमस्कार करके प्रार्थना का रही हूं कि आप मेरे हृदय-मन्दिर में पधार कर उसको सुशोभित कीजिये । यह वियोगिनी विरह-दुःख से दुःखी आपके आने के मार्ग को देख रही है कि भगवान् कब आ रहे हैं ?
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राम नाम इन शब्दों को बार बार जोर से उच्चारण करती हुई अपने प्यारे प्रभु को पुकारती रहती हूं और आने-जाने वाले पथिकों से अपने प्यारे के समाचार पूछती रहती हूं । नेत्रों से प्रेम के आसूंओं को बहाती रहती हूं । हे राम ! आप तो व्यापक और सर्वज्ञ हैं । मैं तो दुःखी होकर आपके चरणों में ही पड़ी रहती हूं । स्थूल-सूक्ष्म दोनों शरीरों की भी स्मृति नहीं रहती । मैं तो प्रायः मरी हुई सी हो गयी हूं, सो दर्शन दीजिये ।
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भक्तिरसायन में –
महात्मा लोग आपके चरण-कमलों को अत्यधिक शान्ति प्रदान करने वाले बतलाते हैं । परन्तु ऐसा जानने वाले भले ही शान्ति देने वाले बतलाते रहें । मैं तो शंतम में जो आदि अक्षर शं है, उसका जरा सा भी अर्थ(शान्ति) नहीं देख रही हूं । क्योंकि मैं आपके वियोग के भय से व्याकुल हूं और मेरा जरा सा भी भय और वियोग शान्त नहीं हो रहा है । अतः दर्शन देकर मेरे भय और वियोग को शान्त करो ।
(क्रमशः)

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