गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

शब्दस्कन्ध ~ पद #३१४

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🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज, व्याकरण वेदांताचार्य, श्रीदादू द्वारा बगड़, झुंझुनूं ।
साभार : महामण्डलेश्वर स्वामीअर्जुनदास जी महाराज, बगड़, झुंझुनूं ।
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
*(#श्रीदादूवाणी शब्दस्कन्ध ~ पद #३१४)*
*राग सोरठ ॥१९॥**(गायन समय रात्रि ९ से १२)*
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*३१४. (गुजराती) सुरफाख्ता ताल*
*हौं जोइ रही रे बाट, तूँ घर आवनें ।*
*तारा दर्शन थी सुख होइ, ते तूँ ल्यावनें ॥टेक॥*
*चरण जोवा नें खांत, ते तूँ देखाड़नें ।*
*तुझ बिना जीव देइ, दुहेली कामिनी ॥१॥*
*नैणें निहारूं बाट, ऊभी चावनी ।*
*तूँ अंतर थी ऊरो आव, देही जावनी ॥२॥*
*तूँ दया करी घर आव, दासी गाँवनी ।*
*जन दादू राम संभाल, बैन सुहाँवनी ॥३॥*
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भादी०-भवदर्शनार्थं मार्ग प्रतीक्षे आगम्यतां मम हृदयगृहे ।दर्शनेनैवाहं सुखिनी? भविष्यामि । स्वरूपं दर्शय । तव चरणकमलयोर्दर्शनपिपासा भूयसी मे मनसि जाग्रति । त्वां विना त्वदीया कामिनी दुःखायते । अतो दर्शनस्य कृपां कुरु अन्यथा प्राणविहीन भविष्यामि । नेत्रयोरश्रु-धारा प्रवहतितराम् । मायापटं विहाय शीघ्रमागम्यताम् अन्यथा प्राणविहीना भविष्यामि । दयस्व दयस्व । आगमनेन मम हृदयमन्दिरं सुशोभय । तव यशोगानकारिणी वास्यस्मि । प्रार्थनां श्रावय । हे राम ! दासीं निभालय ।
उक्तं भक्तिरसायने-
त्रितापपापा यदभीप्सितार्थदं यशस्त्वदीयं भुवि भूरि मंगलम् ।
मुहुः कवीन्द्रेरितमित्यभूरपि रमेश गायन्ति विचिन्त्य दृश्यताम् ।
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मैं आपके दर्शनों के लिये आपका मार्ग देख रही हूं । इसलिये जल्दी ही मेरे हृदय घर में पधारिये । आपके दर्शनों से ही मैं सुखी होऊँगी, अपने स्वरूप का दर्शन दीजिये । आपके चरण-कमलों की प्यास बहुत बढ़ रही है । आपके बिना आपकी कामिनी बहुत दुःखी हो रही है ।
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अतः दर्शन देने की कृपा करें अन्यथा मेरे प्राण चले जायेंगे । आंखों में जल की धारा बह रही है । अपने माया के पड़दे को हटाकर शीघ्र पधारिये नहीं तो प्राण चले जायेंगे । दया करो प्रभो ! मेरे हृदय में विराजिये । मैं तो आपके यश को गाने वाली दासी हूं । अपनी प्रार्थना सुना रही हूं । हे राम मुझे संभालो ।
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भक्तिरसायन में कहा है कि –
आपका यश तीनों तापों को नष्ट करने वाला, इच्छित पदार्थ को देने वाला और मंगल का देने वाला प्रसिद्ध माना गया है । बड़े-बड़े कवियों ने भी यही कहा है । हे रमेश ! मैं आपके गुणों को गाती हूं । आप मेरे दर्शनों की इच्छा को पूर्ण करें ।
(क्रमशः)

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