🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज, व्याकरण वेदांताचार्य, श्रीदादू द्वारा बगड़, झुंझुनूं ।
साभार : महामण्डलेश्वर स्वामीअर्जुनदास जी महाराज, बगड़, झुंझुनूं ।
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
*(#श्रीदादूवाणी शब्दस्कन्ध ~ पद #३२०)*
*राग सोरठ ॥१९॥**(गायन समय रात्रि ९ से १२)*
.
*३२०. विनय । त्रिताल*
*जग जीवन प्राण आधार, वाचा पालना ।*
*हौं कहाँ पुकारूं जाइ, मेरे लालना ॥टेक॥*
*मेरे वेदन अंग अपार, सो दुख टालना ।*
*सागर यह निस्तार, गहरा अति घणा ॥१॥*
*अंतर है सो टाल, कीजै आपणा ।*
*मेरे तुम बिन और न कोइ, इहै विचारणा ॥२॥*
*तातैं करूं पुकार, यहु तन चालणा ।*
*दादू को दर्शन देहु, जाय दुख सालणा ॥३॥*
.
हे मेरे प्राणों के आधार जीवनधन ! आपने प्रतीज्ञा की है कि एक बार भी मेरी शरण में आकर जो यह कह देता है कि ‘हे भगवन् ! मैं आपका हूँ’ तो मैं उसको अभयदान दे देता हूं, यह मेरा व्रत है । दूसरी प्रतिज्ञा यह है कि ज्ञानी भक्त मुझे प्यारा है और ज्ञानी को मैं प्यारा हूं । मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता । पृथ्वी भर में उससे बढ़कर मेरा प्रिय दूसरा नहीं होगा ।
.
मैं भक्तों को दर्शन देता हूं । आदि आप की प्रतिज्ञायें हैं । अतः उनका विचार करो और भक्त को दर्शन देकर अपनी प्रतिज्ञा को सत्य करो । हे प्रियतम ! मेरे लिये तो आप ही सब कुछ हैं । मैं कहाँ जाऊं, किस से अपना दुःख सुनाऊं? आपके दर्शनों के बिना मैं अपार पीड़ा से दुःखी हो रहा हूं । इस पीड़ा को दूर करो ।
.
विषय जल से भरा हुआ यह संसार-सागर जो माया मोह रूपी ग्राहों से भयंकर है, इससे मुझे आप पार उतारें । आपके और मेरे बीच में जो दर्शन का बाधक है, उस प्रतिबन्ध को नष्ट कर दीजिये । मैं तो आपके ही शरण हूं । मेरा दूसरा कोई आधार नहीं, न मैं दूसरों को जानता ही हूं । अब आप से मेरी प्रार्थना है कि शीघ्र दर्शन देकर मेरी इस पीडा को मिटा दें ।
.
भक्तिरसायन में लिखा है कि गोपियाँ कह रही हैं कि– हे दया के समुद्र, श्याम-वर्ण वाले कृष्ण ! त्रिलोकी में यह बात प्रसिद्ध है कि – भगवान् का दर्शन सत्पुरुषों को सुलभ हैं, जो असत् पुरुष हैं उनको दुर्लभ है । यह आपके वचन निरर्थक मालूम होते हैं । क्योंकि हम सती हैं फिर भी आपके दर्शन दुर्लभ हो रहे हैं और जो वंशी जिसमें छिद्र(दोष) ही छिद्र भरे पड़े हैं, उसको आपका दर्शन सुलभ हो रहा है । अतः हम आपके भक्त सत्पुरुष हैं इनको दर्शन देकर अपने वचनों को सत्य सिद्ध करो ।
.
नारदपंचरात्र में कहा है कि –
भक्त ही भगवान् कृष्ण के प्राण हैं और वैष्णवों को कृष्ण ही प्राणों की तरह प्यारा है । इसीलिये वैष्णव कृष्ण को ही भजते रहते हैं और कृष्ण भगवान् अपने प्यारे वैष्णवों को भजते रहते हैं ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें