मंगलवार, 13 जून 2023

*नाम सुन्यो हम भूल विचारी*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*साधु मिलै तब ऊपजै, हिरदै हरि का भाव ।*
*दादू संगति साधु की, जब हरि करै पसाव ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर,राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*चोर धस्यो घर संपति बाँधत,*
*जोर करै नहिं ऊठत भारी ।*
*आय उठाय दिई सु लिई लखि,*
*नाम सुन्यो हम भूल विचारी ।*
*ले धन जाहु उजास करै रवि,*
*आत गुनी दश तौरि जिवारी१ ॥*
*शीश उतारि विचार करा यह,*
*कैत२ भयो शिष बात निवारी ॥३४४॥*
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एक दिन रात्रि के समय एक चोर आपके घर में घुसा और घर की सब संपत्ति एकत्र करके एक गठड़ी बाँध ली । भट्ट जी सब देखते रहे कुछ भी नहीं बोले । चोर की गठरी भारी हो गई । उससे किसी प्रकार भी उठती नहीं थी ।
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यह देखकर भट्ट जी ने आकर चुपचाप उठा दी । चोर ने आपकी यह नूतन रीति देखकर पूछा- "आपका नाम क्या है ? भट्ट जी ने नाम बता दिया । सुनते ही चोर के हृदय में प्रीति प्रकट हो गई, वह विचार करने लगा, ऐसे महात्मा के यहाँ चोरी करना मेरी महान् भूल है ।
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भट्टजी ने कहा—धन को लेकर शीघ्र चले जाओ फिर सूर्य प्रकाश कर देंगे; तब तुमको ले जाने में असुविधा होगी । मेरे यहाँ तो प्रातः इससे दशगुणी और आ जायगी और तुम्हारी तो जीविका१ ही यह है । संकोच मत करो ले जाओ ।
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चोर ने शिर पर से गठरी उतार दी और विचार करके वह बोला२ "मैं तो अब आपका शिष्य हो गया हूँ, यह तो क्या ले जाऊँगा, मैने जीवन भर के लिये यह चोरी करने की बात मन से हटा दी है । अब कभी चोरी नहीं करूँगा" ॥
(क्रमशः)

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