🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीरामकृष्ण०वचनामृत* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*साचा साधु दयालु घट, साहिब का प्यारा ।*
*राता माता राम रस, सो प्राण हमारा ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधु का अंग)*
===============
साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
.
*(३)डा. रुद्र तथा श्रीरामकृष्ण*
.
दोपहर के भोजन के बाद श्रीरामकृष्ण अपनी चारपाई पर बैठ हुए डाक्टर भगवान रुद्र और मास्टर से वार्तालाप कर रहे हैं । कमरे में राखाल, लाटू आदि भक्त भी हैं ।
आज बुधवार है, श्रावण की अष्टमी-नवमी तिथि, २ सितम्बर १८८५ । डाक्टर ने श्रीरामकृष्ण की बीमारी का कुल विवरण सुना । श्रीरामकृष्ण जमीन पर उतरकर डाक्टर के पास बैठे हुए हैं ।
.
श्रीरामकृष्ण - देखो जी, दवा नहीं सही जाती । मेरी प्रकृति कुछ और है ।
“अच्छा, यह तुम्हें क्या जान पड़ता है ? रुपया छूने पर हाथ टेढ़ा हो जाता है । और अगर मैं धोती में गाँठ दे दूँ, तो जब तक वह खोल न दी जाय तब तक के लिए साँस बन्द जाती है ।”
.
यह कहकर उन्होंने एक रुपया ले आने के लिए कहा । डाक्टर को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि रुपये को हाथ पर रखते ही हाथ टेढ़ा हो गया और साँस बन्द हो गयी । रुपये को हटा लेने पर तीन बार साँस कुछ जोर से चली तब हाथ कहीं ठीक हुआ । डाक्टर ने मास्टर से कहा, “Action on the nerves.” (स्नायु के ऊपर क्रिया)
.
श्रीरामकृष्ण डाक्टर से कह रहे हैं- “एक अवस्था और है । कुछ संचय नहीं किया जाता । एक दिन मैं शम्भु मल्लिक के बगीचे में गया था । उस समय पेट में बड़ी पीड़ा थी । शम्भु ने कहा, 'जरा जरा अफीम खाया कीजिये तो ठीक हो जायेगा ।’ मेरी धोती के छोर में जरासी अफीम उसने बाँध दी । जब लौटा आ रहा था तब फाटक के पास चक्कर आने लगा । रास्ता नहीं मिल रहा था । फिर जब अफीम खोलकर फेंक दी गयी तब फिर ज्यों की त्यों अवस्था हो गयी और मैं बगीचे में लौट आया ।
.
“देश में मैं आम तोड़कर लिये आ रहा था, थोड़ी दूर जाने के बाद फिर चल न सका । खड़ा हो गया । फिर आमों को एक गढ़े में जब रख दिया तब कहीं घर आ सका । अच्छा, यह क्या है ?”
डाक्टर - इसके पीछे एक शक्ति और है, मन की शक्ति ।
मणि - ये कहते हैं, यह ईश्वर की शक्ति है और आप बतलाते हैं, मन की शक्ति ।
.
श्रीरामकृष्ण (डाक्टर से) - ऐसी भी अवस्था है - अगर कोई कहता है, ‘पीड़ा घट गयी,’ तो साथ ही साथ कुछ घट भी जाती है । उस दिन ब्राह्मणी ने कहा, ‘आठ आना बीमारी अच्छी हो गयी;’ उसके कहने के साथ ही मैं नाचने लगा ।
.
डाक्टर का स्वभाव देखकर श्रीरामकृष्ण को प्रसन्नता हुई । वे डाक्टर से कह रहे हैं – “तुम्हारा स्वभाव अच्छा है । ज्ञान के दो लक्षण हैं, स्वभाव का शान्त हो जाना और अभिमान का लोप हो जाना ।”
मणि – इन्हें पत्नी-वियोग हो गया है ।
.
श्रीरामकृष्ण (डाक्टर से) - मैं कहता हूँ, इन तीन आकर्षणों के एकत्र होने पर ईश्वर मिलते हैं - माता का बच्चे पर, सती का पति पर तथा विषयी मनुष्य का विषय पर जैसा आकर्षण होता है ।
“कुछ भी हो, भाई, मेरी यह बीमारी अच्छी कर दो ।”
.
डाक्टर अब गला देखेंगे । गोल बरामदे में एक कुर्सी पर श्रीरामकृष्ण बैठे । श्रीरामकृष्ण पहले डाक्टर सरकार की बात कह रहे हैं – “उसने खूब जोर से जीभ दबायी - जैसे बैल की हो !”
डाक्टर - उन्होंने इच्छापूर्वक वैसा न किया होगा ।
श्रीरामकृष्ण - नहीं, ठीक ठीक जाँच करने के लिए उसने जीभ को दबाया । (क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें