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*दादू जागहु लागहु राम सौं, छाड़हु विषय विकार ।*
*जीवहु पीवहु राम रस, आतम साधन सार ॥*
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*श्री रज्जबवाणी पद ~ भाग २*
राग विलावत १२, (गायन समय प्रातः ६ से ९)
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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१६१ चेतावनी । कहरवा
जागो जागो जीव जन्म जाय, कौन नींद घोली१ ।
भजियै भगवंत राय, तजिये माया उपाय ।
ऐसे तन ठौर लाय, देखो दृग खोली ॥टैक॥
सदगुरु की सुनहु कानि२, साँची जीय३ मांहिं मानि ।
होती है परम हानि, हारो निर्मोली४ ॥१॥
ऐसो अवसर विहाय५, करिले कछु भक्ति भाय६ ।
कांधे पर यम रिसाय, शीश सांगि७ रोली८ ॥२॥
सूते हो कवन हेत, आये देखो न श्वेत ।
टूटहिंगे मूंड९ बेंत, छाड़ हु मति भोली ॥३॥
लालच किहिं रहे लागी, दह१० दशि यम दीन्ही आगि ।
जन रज्जब जाग भागि, होती है होली ॥४॥९॥
कल्याणार्थ साधन करने के लिये संकेत कर रहे हैं -
✦ अरे जीवॊं ! मोह निद्रा से जागो शीघ्र जागो, तुम्हारा जन्म समाप्त होने जा रहा है । तुम्हारी आँखे किसलिये निद्रा से घुल१ रही है ? विश्व के राजा भगवान का भजन करो माया प्राप्ति के साधनों को त्यागो । तुम्हारे ऐसे सुन्दर शरीरों को प्रभु के भजन रूप स्थान में लगाओ, अर्थात भजन करो । विचार रूप आँखे खोलकर देखो, तुम्हारे ये शरीर नष्ट होने वाले ही हैं ।
✦ सदगुरु की वाणी श्रवण२ लगाकर सुनो और सत्यमान कर हृदय३ में धारण करो । देखो, तुम्हारी परम हानि हो रही है, तुम अमूल्य४ मनुष्य देह को खो रहे हो ।
✦ ऐसा सुन्दर समय तुम्हारा व्यर्थ जारहा५ है । अरे जो बचा है उसमें तो श्रद्धा६पूर्वक कुछ भगवान की भक्ति करलो । यमराज रुष्ट होकर तुम्हारे कंधे पर खड़ा है और तुम्हारे शिर पर अपना भाला७ डालने८-वाला ही है,
✦ किसलिये सो रहे हो ? देखते क्यों नहीं हो ? तुम्हारे केश श्वेत हो आये हैं । भगवान की भक्ति नहीं करने से तुम्हारे शिर९ यमदूतों की बेंतों से टूटेंगे । इसलिये शीघ्र ही भोली बुद्धि का त्याग करो ।
✦ तुम किस लालच में लग रहे हो ? देखो तो सही यमराज ने दशों१० दिशाओं में मृत्युरूप अग्नि लगा दिया है । सब ओर होली हो रही है अर्थात मानव मरने पर जलाये जा रहे हैं । अत: मोह निंद्रा को त्याग कर शीघ्र भगवन की शरण में जाने के लिए भागो अर्थात भजन करो ।
(क्रमशः)

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