शनिवार, 22 जुलाई 2023

*रसिक मुरारिजी*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*ज्यों आपै देखै आपको, यों जे दूसर होइ ।*
*तो दादू दूसर नहीं, दुःख न पावै कोइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ दया निर्वैरता का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*रसिक मुरारिजी*
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*बाग समाज चले जन देखन,*
*हुक्का दुरावत सोच परयो है ।*
*साधुन मान चहै तन घूम रु,*
*बैठ कहा कित ल्याव धरयो है ॥*
*जाय सुनावत दास तमाखु हु,*
*पास किने२ सुन आनि कर्यो है ।*
*झूठ हिं खैंच रु साँच दिखावत,*
*पाय लिये मन दोष हर्यो है ॥३५७॥*
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एक समय रसिक मुरारि जी के बाग में संतों का समाज विराजमान था । आप दर्शन के लिये गये थे । एक भेषधारी हुक्का पी रहा था, आपके आते देखकर संकोच में पड़ गया और हुक्का छिपा दिया ।
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आप तो सदा साधुओं का सन्मान ही चाहते थे । अपने से उस भेषधारी को संकुचित देखकर, आपने अपना अपराध माना और उसका सन्मान करने के लिये, बिना पीड़ा ही अपने पेट को पकड़कर और पीड़ा वाले के शरीर को घुमाकर बैठ गये और एक सेवक को कहा- "मेरे पेट में बड़ा दर्द हो रहा है, कहीं हुक्का मिल जाय तो उसके पीने से मिट जायगा, देखो किसी संत के पास धरा हो तो ले आओ ।"
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सेवक संतों के पास जाकर सुनाने लगा, किसी के पास तमाखू पीने का हुक्का हो तो शीघ्र दो । गोस्वामी श्रीमुरारि जी के पेट में दर्द है । तब जिसके पास था वह यह सुन कर अति प्रसन्न हुआ और लाकर उपस्थित कर दिया ।
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आपने झूठे ही वास्तव में पीने वाले के समान खेंचकर दिखाया और पीड़ा रहित हो गये । उस साधु ने भी जान लिया कि ये भी पीते हैं । इस प्रकार आपने उस साधु के मन का संकोच रूप दोष हर कर उसे प्रसन्न किया था ।
(क्रमशः)

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