बुधवार, 5 जुलाई 2023

*अन्यन(अनन्य) भजन कौ अंग ॥*

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*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी*
*दादू कहतां कहतां दिन गये, सुनतां सुनतां जाइ ।*
*दादू ऐसा को नहीं, कहि सुनि राम समाइ ॥१०३॥*
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बषनां बाणी सो भली, जा बाणी मैं राम ।
बकणा सुणना बोलणा, राम बिना बेकाम ॥११॥
बषनांजी कहते हैं, बाणी = वचन वही भली है जिसमें राम नाम हो । बिना नाम के बकणा = उपदेश-भाषण आदि देना, सुणना = श्रवण = भगवद् कथादि सुणना अथवा कोई भी बात सुनना तथा बोलणा = कहना सर्वथा व्यर्थ हैं । इनकी सार्थकता मात्र और मात्र रामनाम के साथ ही है ॥११॥
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*अन्यन(अनन्य) भजन कौ अंग ॥*
आठ चौक नौ सोलह न सोहै, जे मुख मँडणाँ न होइ ।
अैसें हरि का नाँव बिन, बषनां सोभ न कोइ ॥१२॥
जिस प्रकार आठ चौक बत्तीस दाँत, नौ = नव रस और सोलह = श्रृंगारादि सोलह श्रृंगार तब तक शोभा नहीं देते जब तक कि मुख सुंदर न हो । इसी प्रकार जब तक मुख से राम-नाम का जप नहीं होता तब तक मनुष्य जन्म की शोभा नहीं होती ॥१२॥
(क्रमशः)

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