शनिवार, 8 जुलाई 2023

*१२. भूगर्भजी गोस्वामी की पद्य टीका*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*शब्दों मांहिं राम-रस, साधों भर दीया ।*
*आदि अंत सब संत मिलि, यों दादू पीया ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शब्द का अंग)*
==========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*१२. भूगर्भजी गोस्वामी की पद्य टीका*
.
*भूगर्भ जू बसि के सु वृन्दावन,*
*कुंजन को सुख गोविन्द लीयो ।*
*है सु विरक्त हि रूप सु माधुर,*
*स्वाद लियो मिल भक्तन जीयो ॥*
*मानस भोग लगाय निहारत,*
*वै हि जुगल्ल स्वरूप सु पीयो ।*
*बुद्धि समान बखान करो बहु,*
*रंग भरयो रस जान रु कीयो ॥३५३॥*
भूगर्भ गोस्वामजी धाम निष्ठा के भक्त थे । आपने दृढतापूर्वक वृन्दावन में ही निवास किया था और अति अनुपम श्रीगोविन्द कुंज(मंदिर) में विराजमान होकर गोविन्ददेवजी के दर्शन का सुख प्राप्त किया था ।
.
आप संसार से अति विरक्त थे किन्तु प्रभु रूप की रूपमाधुरी के अति ही अनुरागी थे । प्रभु रूपमाधुरी का आस्वान करते हुए भक्तों के साथ मिलकर जीवन धारण करते थे और....
.
उसी मन में देखे हुए युगल स्वरूप का दर्शनामृत सदा पान करते थे । आप ही अगम्य स्थिति का कथन मैने मेरी बुद्धि के अनुसार ही किया है । आपके हृदय में तो बहुत रंग-रस भरा है ।
.
उसको रस रूप संत ही यथार्थ रूप से जान सकते हैं । अतः मैने तो कुछ ही कथन करके संतोष किया है ॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें