शनिवार, 25 मई 2024

शब्दस्कन्ध ~ पद #४२९

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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*भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरण वेदांताचार्य, श्रीदादू द्वारा बगड़, झुंझुनूं ।*
*साभार : महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जुनदास जी महाराज, बगड़, झुंझुनूं ।*
*#हस्तलिखित०दादूवाणी सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी*
*(#श्रीदादूवाणी शब्दस्कन्ध ~ पद #४२९)*
*राग धनाश्री ॥२७॥**(गायन समय दिन ३ से ६)*
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*४२९. पद उपदेश चेतावणी । प्रतिताल*
*जियरा ! राम भजन कर लीजे ।*
*साहिब लेखा माँगेगा रे, उत्तर कैसे दीजे ॥टेक॥*
*आगे जाइ पछतावन लागो, पल पल यहु तन छीजे ।*
*तातैं जिय समझाइ कहूँ रे, सुकृत अब तैं कीजे ॥१॥*
*राम जपत जम काल न लागे, संग रहै जन जीजे ।*
*दादू दास भजन कर लीजे, हरि जी की रास रमीजे ॥२॥*
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हे मन ! जब तक तेरा यह शरीर स्वस्थ है तब तक श्री राम को भज ले । वृद्धावस्था में भजन नहीं बनेगा । फिर तो तुझे अन्त में पश्चाताप ही करना पड़ेगा । जब तेरा हिसाब होगा, तब भजन किये बिना परमात्मा को क्या जवाब देगा ? क्योंकि तेरी गर्भ में रहते हुए प्रभु से भजन करने की प्रतिज्ञा की हुई है ।
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इसलिये हे मन ! मैं तेरे को उद्बोधन कर रहा हूँ कि अभी से ही भजन में लग जा अन्यथा तू आगे दुःखी होगा । राम नाम को जपने वाला तो कभी यमराज से भी नहीं डरता क्योंकि वह भजन द्वारा अद्वैत ब्रह्म में सदा लीन रहता है । तू भी भजन के द्वारा उस प्रभु को प्राप्त करले और उसी की शरण में जाकर वहां पर राम के आनन्द का अनुभव कर ।
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लिखा है कि पारमार्थिक अद्वैत और भजन के लिये द्वैत, वह इस तरह की जो भक्ति है वह तो सैकड़ों मुक्तियों से भी श्रेष्ठ है । क्योंकि ऐसी द्वैतभाव से की हुई भक्ति तो मुक्ति की देने वाली है । निराकरण रूप से प्रत्येक चैतन्याभिन्न परब्रह्म के साक्षात्कार के पहले द्वैत मोह के लिये ही है । परन्तु भक्ति के लिये जो भावित द्वैत बुद्धि है, वह तो अद्वैत से भी सुन्दर है, क्योंकि मोक्ष प्राप्त होता है ।
(क्रमशः)

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