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*जे पहली सतगुरु कह्या, सो नैनहुँ देख्या आइ ।*
*अरस परस मिलि एक रस, दादू रहे समाइ ॥*
*साभार ~ @Subhash Jain*
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जन्म कुंडली या होरोस्कोप उसका ही टटोलना है। हजारों वर्ष से हमारी कोशिश यही है कि जो बच्चा पैदा हो रहा है वह क्या हो सकेगा ? हमें कुछ तो अन्दाज मिल जाए तो शायद हम उसे सुविधा दे पाएं। शायद हम उससे आशाएं बांध पाएं। जो होने वाला है, उसके साथ हम राजी हो जाएं।
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मुल्ला नसरुद्दीन ने अपने जीवन के अन्त में कहा है कि मैं सदा दुखी था। फिर एक दिन मैं अचानक सुखी हो गया। गांवभर के लोग चकित हो गए कि जो आदमी सदा दुखी था और जो आदमी हर चीज का अंधेरा देखता था वह अचानक प्रसन्न कैसे हो गया—जो हमेशा पेसिमिस्ट था, जो हमेशा देखता था कि कांटे कहां—कहां ??!
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एक बार नसरुद्दीन के बगीचे में बहुत अच्छी फसल आ गई। सेव बहुत लगे—ऐसे कि वृक्ष लद गए ! पड़ोस में एक आदमी ने पूछा, सोचा उसने कि अब तो नसरुद्दीन कोई शिकायत न कर सकेगा —कहा कि इस बार तो फसल ऐसी है कि सोना बरस जायेगा, क्या खयाल है, नसरुद्दीन! नसरुद्दीन ने बड़ी उदासी से कहा, और सब तो ठीक है लेकिन जानवरों को खिलाने के लिए सड़े सेव कहां से लाओगे ? उदास बैठा है वह। जानवरों को खिलाने के लिए सडे सेव कहां से लाओगे, सब सेव अच्छे हैं, कोई सड़ा हुआ ही नहीं ! एक मुसीबत है।
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वह आदमी एक दिन अचानक प्रसन्न हो गया तो गांव के लोगों को हैरानी हुई तो गांव के लोगे ने पूछा कि तुम और प्रसन्न—नसरुद्दीन ! क्या राज है इसका ? नसरुद्दीन ने कहा, आई हेव लर्न्ट टु कोआपरेट विद दि इनइवीटेबल। वह जो अनिवार्य है मैं उसके साथ सहयोग करना सीख गया हूं। बहुत दिन लड़कर देख लिया। अब मैंने यह तय कर लिया है कि जो होना है, होना है ! अब मैं सहयोग करता हूं इनइवीटेबल के साथ— जो अनिवार्य है उसके साथ मैं सहयोग करता हूं। अब दुख का कोई कारण न रहा। अब मैं सुखी हूं।
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ज्योतिष बहुत बातों की खोज थी। उसमें जो अनिवार्य है, उसके साथ सहयोग—वह जो होने ही वाला है, उसके साथ व्यर्थ का संघर्ष नहीं, जो नहीं होनेवाला है, उसकी व्यर्थ की मांग नहीं, उसकी आकांक्षा नहीं ! ज्योतिष मनुष्य को धार्मिक बनाने के लिए, तथाता में ले जाने के लिए, परम स्वीकार में ले जाने के लिए उपाय था। उसके बहु आयाम है।
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हम धीरे— धीरे एक—एक आयाम पर बात करेंगे। आज तो इतनी बात, कि जगत एक जीवंत शरीर है, आर्गनिक यूनिटी है। उसमें कुछ भी अलग—अलग नहीं है—सब संयुक्त है। दूर से दूर जो है वह भी निकट से निकट जुडा है—अजुडा कुछ भी नहीं है। इसलिए कोई इस भांति में न रहे कि वह आइसोलेटेड आइलैंड है। कोई इस भांति में न रहे कि कोई एक द्वीप है छोटा—सा— अलग— थलग।
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नहीं, कोई अलग— थलग नहीं है, सब संयुक्त है और हम पूरे समय एक दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं और एक दूसरे से प्रभावित हो रहे हैं। सड़क पर पड़ा हुआ पत्थर भी, जब आप उसके पास से गुजरते हैं तो आपकी तरफ अपनी किरणें फेंक रहा है। फूल भी फेंक रहा है। और आप भी ऐसे नहीं गुजर रहे हैं, आप भी अपनी किरणें फेंक रहे हैं।
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मैने कहा कि चांद—तारों से हम प्रभावित होते हैं। ज्योतिष का और दूसरा खयाल है कि चांद—तारे भी हमसे प्रभावित होते हैं, क्योंकि प्रभाव कभी भी एक तरफा नहीं होता। जब कभी बुद्ध जैसा आदमी जमीन पर पैदा होता है तो चांद यह न सोचे कि चांद पर उनकी वजह से कोई तूफान नहीं उठते। बुद्ध की वजह से कोई तूफान चांद पर शांत नहीं होते ! अगर सूरज पर धब्बे आते हैं और तूफान उठते हैं तो जमीन पर बीमारियां फैल जाती है। तो जमीन पर जब बुद्ध जैसे व्यक्ति पैदा होते हैं और शान्ति की धारा बहती है और ध्यान का गहन रूप पृथ्वी पर पैदा होता है तो सूरज पर भी तूफान फैलने में कठिनाई होती है—सब संयुक्त है !
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एक छोटा—सा घास का तिनका भी सूरज को प्रभावित करता है। और सूरज भी घास के तिनके को प्रभावित करता है। न तो घास का तिनका इतना छोटा है कि सूरज कहे कि तेरी हम फिक्र नहीं करते और न सूरज इतना बड़ा है कि यह कह सके कि घास का तिनका मेरे लिए क्या कर सकता है—जीवन संयुक्त है ! हां छोटा—बड़ा कोई भी नहीं है, एक आर्गनिक यूनिटी है—एकात्म है। इस एकात्म का बोध अगर खयाल में आए तो ही ज्योतिष समझ में आ सकता है, अन्यथा ज्योतिष समझ में नहीं आ सकता है।
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ओशो; मैं कहता आंखन देखी
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