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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१२ आचार्य नारायणदास जी ~
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माधोपुरा चातुर्मास ~
केवलदासजी चोहट्या माधोपुर वालों का चातुर्मास वि. सं. १९०१ का आचार्य प्रेमदास जी महाराज ने ही माना था और शेखावटी की रामत करके चातुर्मास में बैठने वाले थे किन्तु उनका स्वास्थ्य सिरोही(शेखावटी) में कुछ शिथिल हो गया था । इससे सिरोही से नारायणा दादूधाम को लौट गये और ज्येष्ठ शुक्ला १ शनिवार वि. सं. १९०१ को ब्रह्मलीन हो गये ।
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फिर केवलदासजी ने आचार्य नारायणदासजी को प्रार्थना की तब उन्होंने वि. सं. १९०२ का चातुर्मास केवलदास चोहट्या के माधोपुर में किया केवलदासजी अति श्रद्धा से संत मंडल के सहित आचार्यजी की सेवा करते थे । संतों का भी सत्संग भजन निर्विध्न चलता था । रसोइयां भी बहुत आती थी । आसपास के स्थानधारी संत तथा भक्त लोग रसोइयां लेकर आते थे । कुछ दिन ठहर कर सत्संग का आनन्द भी लेते थे । वैसे भी सत्संग और संत दर्शन के लिये आसपास के भक्त लोग आते ही रहते थे । उक्त प्रकार यह चातुर्मास अच्छा ही हुआ था ।
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चातुर्मास समाप्ति पर केवलदासजी ने आचार्यजी को मर्यादा अनुसार भेंट देकर आशीर्वाद प्राप्त किया था । संत मंडल को भी पूरा- पूरा वस्त्र देकर प्रसन्न किया था । चातुर्मास से विदा होकर रामत करते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये थे और कुछ समय तक वहां ही भजन करते रहे थे ।
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बीकानेर से टीका की भेंट ~
आचार्य नारायणादासजी महाराज के गद्दी पर विराजने के समय किसी कारण वश बीकानेर नरेश की ओर से टीका की भेंट नहीं आ सकी थी, सो वि. सं. १९०३ फाल्गुण शुक्ला ३ को बीकानेर नरेश ने- घोडा, दुशाला आदि जो परंपरा से भेजते आये थे सो टीका की भेंट भी भेजी । आचार्य नारायणादासजी महाराज ने उसे स्वीकार करके अपनी परंपरा के अनुसार बीकानेर नरेश के लिये नारायणा दादूधाम से प्रसाद व शुभाशीर्वाद भेजा ।
(क्रमशः)

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