बुधवार, 31 दिसंबर 2025

जोधपुर से टीका की भेंट ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१२ आचार्य नारायणदास जी ~
जोधपुर से टीका की भेंट ~
आचार्य नारायणादासजी महाराज के गद्दी पर बैठने के समय किसी कारण से जोधपुर नरेश की ओर से टीका की भेंट नहीं आ सकी थी । वह वि. सं. १९०४ आश्‍विन शुक्ला ५ को आई । आचार्य नारायणादासजी महाराज ने उसे स्वीकार करके अपनी परंपरा के अनुसार नारायणा दादूधाम से प्रसाद व शुभाशीर्वाद भेज दिया । 
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सुखभजनजी के चातुर्मास ~
वि. सं. १९०४ का चातुर्मास आचार्य नारायणादासजी महाराज ने सुखभजनजी लोरडी वालों का माना था । इस चातुर्मास में चातुर्मास की मर्यादा के अनुसार दादूवाणी आदि का प्रवचन सत्संग भजन- कीर्तन जागरण आदि सभी कार्य नियम पूर्वक होते रहे थे । 
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संत- सेवा में किसी प्रकार की त्रृटि नहीं आने दी थी । समाप्ति पर आचार्य नारायणादासजी महाराज को मर्यादानुसार भेंट, भंडारी आदि कर्मचारियों को उनका दस्तूर तथा सब संतों को वस्त्र देकर प्रसन्न किया था । उक्त प्रकार अच्छा चातुर्मास कराकर आचार्यजी की तथा सब संतों की आशीर्वाद लेकर, सब को सस्नेह विदा किया था ।
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जमातरामगढ का चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९०५ का चातुर्मास आचार्य नारायणदासजी महाराज ने शिष्य मंडल के सहित बडी जमात रामगढ में किया था । इस चातुर्मास में भी दादूवाणी का प्रवचन आदि सत्संग, जागरण, भजन- कीर्तन, नाम ध्वनि आदि बहुत अच्छी प्रकार होते रहे थे । रसोइयां बहुत हुई थीं । 
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आचार्यजी सहित सब प्रसन्न रहे थे । भजन ध्यानादि साधन में किसी भी प्रकार का विध्न नहीं आया था । चातुर्मास समाप्ति पर मर्यादानुसार आचार्यजी को भेंट, भंडारी आदि कर्मचारियों को उनका, दस्तूर, सब संतों को वस्त्रादि देकर संतुष्ट किया था तथा सत्कार पूर्वक रामगढ से विदा किया था ।
(क्रमशः) 

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