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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१२ आचार्य नारायणदास जी ~
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जयपुर नरेश का आना ~
आश्विन कृष्णा १२ को जयपुर नरेश सवाई रामसिंहजी सवारी लगाकर नारायणा दादूधाम के आचार्य नारायणदासजी महाराज के पास पधारे, भेंट चढाकर प्रणाम की और सामने बैठ गये और आचार्यजी से घंटों तक शास्त्र चर्चा सत्संग करते रहे । पश्चात् प्रणाम करके राज भवन को चले गये । उक्त प्रकार राजा प्रजा की श्रद्धा आचार्यजी पर बढती ही जाती थी । प्रतिदिन भक्त लोग आते ही रहते थे ।
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अन्य सरदारों का आना ~
एक दिन घूला के रावसाहब भी आये । आचार्य नारायणदासजी महाराज के दर्शन करके अति प्रसन्न हुये शिष्टाचार के अनुसार भेंट चढाकर प्रणाम की और सामने बैठकर बहुत देर तक सत्संग करते रहे । अपनी शंकायें निवृत हो जाने पर उनका मन अत्यन्त आनन्द में निमग्न हो गया और फिर तो वे बारंबार सत्संग के लिये आते ही रहते थे ।
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बगरु ठाकुर साहिब भी आचार्य नारायणदासजी महाराज के दर्शनार्थ आये और अति सत्कार के साथ अपनी मर्यादा के अनुसार भेंट चढाकर प्रणाम की और सामने बैठकर सत्संग करते रहे । बगरु ठाकुर साहिब के पूर्वज नारायणा दादूधाम पर पूर्ण श्रद्धा रखते आते थे । पूर्वजों के समान ही तत्कालीन ठाकुर साहब ने अपनी श्रद्धा का अच्छा परिचय दिया और प्रणाम कर चले गये किन्तु कभी- कभी फिर आते रहते थे ।
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राज माता की रसोई ~
श्रीमती राजमाता सीसोदणजी ने शिष्य मंडल के सहित आचार्य नारायणदासजी महाराज को रसोई दी । बहुत सुन्दर पदार्थ बनवाकर अति प्रीति से आचार्यजी और संतों को जिमाया और आचार्यजी की मर्यादा के अनुसार भेंट दी, तथा सब संतों का भी अच्छा सत्कार किया ।
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राजमाता जी की श्रद्धा भक्ति अति श्लाघनीय थी । उक्त प्रकार आचार्यजी और संतों को भोजन कराकर माताजी अति प्रसन्न हुई थी । आचार्यजी तथा संत मंडल का शुभाशीर्वाद प्राप्त करके राजमाताजी का हृदय आनन्द से भर गया था । चातुर्मास करके भी आचार्यजी भक्तों के आग्रह से जयपुर अधिक ठहरे थे ।
(क्रमशः)

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