सोमवार, 26 जनवरी 2026

रामगढ गमन ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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रामगढ गमन ~ 
जीन्द नरेश के चातुर्मास से विदा होकर पोद्दार भक्तों के आग्रह से रामगढ शेखावटी के लिये प्रस्थान किया । मार्ग के सेवकों को अपने दर्शन सत्संग से आनन्दित करते हुये रामगढ के पास आकर पोद्दार सेवकों को अपने आने की सूचना दी । सूचना मिलने पर पोद्दार भक्त एकत्र होकर बाजे गाजे के साथ संकीर्तन करते हुये आचार्य उदयराम जी महाराज की अगवानी करने आये । भेंट चढाकर सत्यराम बोलते हुये सेवकों ने दंडवतें की । 
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प्रणामादि शिष्टाचार हो जाने के पश्‍चात् अति सम्मान के सहित संकीर्तन करते हुये नगर के मुख्य बाजार से ले जाकर नियत स्थान पर ठहराया । सेवा का समयक् प्रबन्ध कर दिया और पोद्दार वंश के आबाल वृद्ध स्त्री पुरुषों ने अति श्रद्धा भक्ति से सत्कार करके आचार्य जी से उपदेश लिये । पश्‍चात् प्रतिदिन सत्संग करने लगे । 
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दादूवाणी पर पोद्दारों की अति श्रद्दा थी । अत: वे दादूवाणी का प्रवचन बहुत ही रुचि से श्रवण करने लगे । भाग्यशाली पोद्दार भक्तों के परिवारों की रुचि दादूवाणी के प्रवचन श्रवण में बढती ही जाती थी । अत: वे सब अपने परिवारों के सहित दादूवाणी का प्रवचन आरंभ होने से पहले ही प्रवचन स्थान पर आकर ‘दादूराम’ मंत्र की ध्वनि करने लग जाते थे । 
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प्रवचन आरंभ होने पर चित्र लिखित मूर्तियों के समान स्थिर होकर अति प्रेम से प्रवचन श्रवण करते थे । शिष्य संत मंडल के सहित आचार्य जी को भोजन कराने अपने घरों पर अति सत्कार से ले जाते थे । मर्यादा पूर्वक भोजन कराकर पुन: सन्मान के साथ आसन पर पहुँचा देते थे । उक्त प्रकार जब तक आचार्य उदयराम जी महाराज रामगढ में विराजे तब तक पोद्दार भक्तों ने सत्संग तथा संत सेवा में शिथिलता लेश मात्र भी नहीं आने दी । 
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फिर आचार्य जी रामगढ से पधारने लगे तब मर्यादा पूर्वक भेंट देकर सस्नेह विदा किया । सीकर नरेश द्वारा सत्कार ~ रामगढ से विदा होकर आचार्य उदयराम जी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित मार्ग की धार्मिक जनता को अपने दर्शन व सत्संग से प्रसन्न करते हुये सीकर पहुँचे । 
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सीकर राजा माधवसिंह जी ने तथा राजमाता जी ने अति प्रेम से आचार्य उदयराम जी महाराज का आतिथ्य किया और मर्यादा पूर्वक राव राजा माधवसिंह जी ने तथा राजमाता जी ने आचार्य जी के भेंट चढाई । ठहरने का अवकाश नहीं होने से आचार्य उदयराम जी महाराज इस समय सीकर में अधिक नहीं ठहर सके । नारायणा दादूधाम के लिये प्रस्थान किया और मार्ग के स्थानधारी साधुओं का आतिथ्य ग्रहण करते हुये नारायणा दादूधाम में पधारे । 
(क्रमशः)

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