*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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नाभा गमन ~
पटियाला से विदा होकर आचार्य उदयरामजी महाराज संत मंडल के सहित धार्मिक जनता को ब्रह्मभक्ति का उपदेश करते हुये नाभा पधारे । नाभा नरेश भरपूरसिंहजी को जब आप के पधारने की सूचना मिली तब उन्होंने आचार्य उदयरामजी महाराज का शिष्य संत मंडल के साथ अच्छा स्वागत किया तथा यथोचित सेवा करते हुये सत्संग भी किया ।
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नाभा की धार्मिक जनता ने भी आपका अच्छा आदर किया और ज्ञान भक्ति वैराग्यादि से परिपूर्ण दादूवाणी के प्रवचन आप से सुनने में बहुत रुचि दिखाई । आपके सरस भाषणों को सुनते हुये भक्त लोग तृप्त होते ही नहीं थे । सत्संग का समय समाप्त होने पर भी उनकी इच्छा रहती थी थोडा और भी सुनायें तो बहुत अच्छा हो ।
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उक्त प्रकार नाभा के भक्तों की बुद्धि वृति को ब्रह्म विचार में प्रवृत करके वहां से चलने का विचार किया तब नाभा के भक्तों ने मर्यादा पूर्वक भेंटादि देकर स्नेह के साथ विदा किया ।
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कोटकपूरा गमन ~
नाभा से विदा होकर आचार्य उदयरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित शनै: शनै: कोटकपूरा पधारे । वहां के राजा वजीरसिंहजी को आपके आने की सूचना मिली तब उन्होंने भी आचार्य उदयरामजी महाराज का उनकी मर्यादा के अनुसार अच्छा स्वागत किया ।
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अच्छे एकांत स्थान पर ठहराकर सेवा की सुन्दर व्यवस्था कर दी और सत्संग करके मर्यादानुसार भेंट भी दी । कोटकपूरा की धार्मिक जनता को भी आपका मधुर प्रवचन बहुत प्रिय लगा । इससे जनता ने आपसे प्रार्थना की कि कुछ दिन हम लोगों के कल्याणार्थ आप यहां ठहरकर हमको दादूवाणी का प्रवचन सुनाइये ।
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आचार्यजी ने जनता की प्रार्थना स्वीकार करली । दादूवाणी का प्रवचन होने लगा । जनता अति श्रद्धाभाव से नियम पूर्वक सुनने लगी । रसोई आदि संत सेवा भी अच्छी प्रकार जनता करने लगी । जनता की प्रवचन में रुचि नित्य नूतन बढती ही जाती थी । वहां का सत्संग श्लाघनीय ही रहा ।
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जब आचार्य उदयरामजी वहां से विचरने लगे तब भक्त लोगों ने आपको पूर्वक भेंटादि देकर सस्नेह विदा किया । फिर आप लोक - कल्याणार्थ देश में भ्रमण के साथ साथ जनता को हितोपदेश देते हुये शनै: शनै: नारायणा दादूधाम में पधार गये और दादूधाम-दादूद्वारे ही ठहर गये ।
(क्रमशः)

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