शनिवार, 24 जनवरी 2026

जीन्द नरेश के यहां चातुर्मास ~

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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जीन्द नरेश के यहां चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९२८ में आचार्य उदयराम जी महाराज का चातुर्मास जीन्द नरेश रंगवीरसिंह जी ने निमंत्रण देकर मनाया । आचार्य जी ने स्वीकार किया । समय पर शिष्य संत मंडल के सहित आचार्य जी ने नारायणा दादूधाम से जीन्द प्रदेश के लिये प्रस्थान किया और शनै: शनै: मार्ग की धार्मिक जनता को अपने दर्शन सत्संग से आनन्दित करते हुये जीन्द राज्य की राजधानी संगरुर के पास पहुँच गये । 
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तब अपने आने की सूचना राजा रंगवीर सिंह जी को दी । सूचना मिलने पर वे राजकीय ठाट बाट से भक्त मंडल के सहित संकीर्तन करते हुये आचार्य जी अगवानी करने आये । मर्यादा पूर्वक भेंट चढाकर सत्यराम बोलते हुये प्रणाम किया । 
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सामने बैठकर आवश्यक प्रश्‍नोत्तर हो जाने के पश्‍चात् आचार्य जी को अति सत्कार से सवारी पर बैठाकर संकीर्तन करते हुये साथ लेकर नगर के मुख्य बाजार से जनता को आचार्य जी तथा संत मंडल का दर्शन कराते हुये नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया और प्रसाद बांटकर शोभा यात्रा समाप्त की । 
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राजा ने संत सेवा का सब प्रबन्ध अच्छी प्रकार करा दिया और सेवकों को भी कह दिया कि सेवा का पूरा-पूरा ध्यान रखना । नगर में चातुर्मास सत्संग की सूचना दे दी गई । सत्संग आरंभ हो गया । चातुर्मास के सभी कार्यक्रम यथावत होने लगे । 
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संगरुर की जनता दादूवाणी से भली प्रकार परिचित थी । कारण- नारायणा दादूधाम के पूर्वाचार्य भी वहां आ चुके थे । उनसे पहले भी वहां की जनता ने दादूवाणी के प्रवचन सुने थे । दादूवाणी की कथा पर स्वाभाविक प्रेम था । इस से कथा श्रवण के लिये जनता बहुत आती थी । 
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राजा तथा परिवार के लोग भी सत्संग में भाग लेते थे । संत तथा सेवक सभी दादूवाणी के प्रवचन से आनन्दित होते थे । मध्यदिन में उपनिषद् आदि के प्रवचन विद्वान् संत करते थे । सत्संग बहुत अच्छा चल रहा था । 
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आरती, अष्टक, पदगायन, संकीर्तन, जागरण आदि सर्व कार्यक्रमों में जनता भाग लेती थी । उक्त प्रकार चातुर्मास का क्रम अच्छा चला । समाप्ति पर आचार्य जी को मर्यादानुसार भेंट तथा संतों को वस्त्र देकर सस्नेह विदा किया । 
(क्रमशः)  

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