बुधवार, 28 जनवरी 2026

जोधपुर गमन ~

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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जोधपुर गमन ~ 
वि. सं. १९२९ में मारवाड की रामत करते हुये आचार्य उदयराम जी महाराज माघ शुक्ला ४ को जोधपुर पधारे । अपनी मर्यादा के अनुसार अपने अपने की सूचना जोधपुर नरेश को दी । 
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सूचना मिलने पर जोधपुर राज्य की मर्यादा के अनुसार जोधपुर नरेश की ओर से जालोरी दरवाजे के पास आचार्य उदयराम जी अगवानी करने के लिये चान्दी के होदे का हाथी १, पंचरंगी घोडे ४ मय जेवर के, रिसाले के घोडे ५०, पलटन, चोबदार ४, निशान व बाजा लेकर मोहता विजयसिंह जी का कंवर, बक्शी समरथ जी कंवर आदि आये । 
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मर्यादानुसार प्रणामादि शिष्टाचार व आवश्यक प्रश्‍नोत्तर हो जाने पर आचार्य उदयराम जी महाराज को हाथी पर विराजमान कराके बाजार से ले जाकर बलूंदा ठाकुरों की हवेली में ठहराया । इस समय जोधपुर नरेश अस्वस्थ थे, अत: माघ शुक्ला ११ को महाराज कुमार आचार्य जी का दर्शन करने आये । 
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भेंट चढाकर प्रणाम की और विनय पूर्वक आचार्य जी के सामने बैठ गये । आचार्य जी ने महाराज कुमार को दुपट्टा प्रसाद दिया । महाराज कुमार ने उसे मस्तक के लगा कर ग्रहण किया । फिर कुछ देर शास्त्र चर्चा सत्संग करके तथा प्रणाम करके राजभवन को चले गये ।
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जोधपुर नरेश को प्रसाद ~ 
वि. सं. १९२९ में फाल्गुण कृष्णा १४ को जसवंतसिंह जी द्वितीय जोधपुर राज्य की गद्दी पर बैठे तब आचार्य उदयराम जी ने भंडारी रामरत्नजी के द्वारा नारायणा दादूधाम का आशीर्वाद व प्रसाद भेजा । जोधपुर नरेश जसवंतसिंह जी द्वितीय ने उसे आदर पूर्वक ग्रहण किया तथा मोहता विजयसिंह जी को आज्ञा देकर आचार्य उदयराम जी को प्रसाद प्राप्ति का पत्र और पत्र के साथ ही खासा घोडा दुशाला आदि आचार्य जी की सेवा में भिजवाये ।
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वाटका में चातुर्मास ~  
वि. सं. १९३० में रामविलास जी वाटका वालों ने आचार्य उदयराम जी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण दिया । आचार्य जी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय आने पर आचार्य जी अपने शिष्य संत मंडल के सहित वाटका पधारे । रामविलास जी ने आचार्य जी के सहित संत मंडल का सामेला किया और स्थान पर लाकर ठहराया । 
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सेवा का सुचारु रुप से प्रबन्ध कर दिया गया । चातुर्मास के कार्यक्रम सब आरंभ हो गये । कथा, पद- गायन, संकीर्तन आदि सब समय पर होने लगे । आस- पास के स्थानधारी साधुओं की तथा सेवकों की रसोइयां भी आने लगी । जागरण के दिन जागरण होने लगे । उक्त प्रकार अच्छा चातुर्मास हुआ । 
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समाप्ति पर आचार्य जी को मर्यादा पूर्वक भेंट, साधुओं को वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया । वाटका से विदा होकर आचार्य उदयराम जी महाराज अपने शिष्य संत मंडल के सहित मार्ग के स्थानधारी साधुओं तथा सेवकों का आतिथ्य ग्रहण करते हुये शनै: शनै: नारायणा दादूधाम में पधार गये । 
(क्रमशः)

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