*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
.
आचार्य उदयरामजी के टीका की भेंट ~
आचार्य उदयरामजी महाराज के गद्दी पर विराजने के उपलक्ष में टीका की मुख्य- मुख्य भेंटें इस प्रकार आई थीं- जयपुर राज्य से- घोडा और दुशाला, अलवर राज्य से- हाथी, दुशाला,पाग, पार्चाथान आये । कोटा नरेश की ओर से दुशाला, दुपट्टा, मोहर । जीन्द नरेश की ओर से दुशाला, पाग आदि भेंटें आई ।
.
संपूर्ण दादूपंथी साधु समाज से अपनी- अपनी मर्यादा के अनुसार भेंटें आई । गृहस्थ धनी सज्जनों की ओर से भी टीके के दस्तूर की भेंटें आई । उक्त प्रकार भेंट का दस्तूर संपन्न हुआ ।
.
उदयरामजी की विषेशता ~ आचार्य उदयरामजी महाराज भजनानन्दी महात्मा होते हुये भी जनरंजन करने में बहुत ही प्रवीण थे । ऐसी सुन्दर पद्धति से उपदेश करते थे जिससे अल्प बुद्धिवाले मानव भी गंभीर से गंभीर विषय को अनायस ही समझ जाते थे । विद्वता के साथ- साथ आपका अनुभव भी विचित्र था ।
.
श्रीदादू वाणी का प्रवचन तो आप परंपरा से सुनते ही आ रहे थे इससे दादूवाणी के समझाने में तो आप परम कुशल थे । दादूवाणी का प्रवचन आपका बहुत ही अनुभव पूर्ण होता था । निगुर्ण परब्रह्म का स्वरुप सर्व साधारण को समझाना और उसकी निर्गुण भक्ति में अधिकारी मानवों को लगाना तो आपका मुख्य काम ही था ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें