*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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सीकर चातुर्मास ~
वि. सं. १९२९ में सीकर निवासी जीवणराम जी पोकरमल जी वियाणी ने आचार्य उदयराम जी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण दिया । आचार्य जी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय समीप आने पर आचार्य उदयराम जी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित चातुर्मास करने सीकर पधारे ।
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वियाणी भक्तों को तथा सीकर नरेश माधवसिंहजी को अपने आने की सूचना दी । तब सीकर नरेश माधवसिंह जी स्वयं ही राजकीय लवाजमा तथा वियाणी भक्तों को साथ लेकर बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये आचार्य उदयराम जी महाराज की अगवानी करने के लिये उनके पास गये । सीकर नरेश माधवसिंह जी ने मर्यादा अनुसार भेंट चढाकर सत्यराम बोलते हुये प्रणाम की और उचित आसन पर बैठ गये ।
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फिर वियाणी भक्तों ने भेंटें चढाकर सत्यराम बोलते हुये दंडवतें की । पश्चात् आचार्य जी को सवारी पर विराजमान कराकर बाजे गाजे के साथ संकीर्तन करते हुये नगर के मुख्य बाजार से जनता को आचार्य जी के तथा संत मंडल के दर्शन कराते हुये नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया ।
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वियाणी भक्तों ने सेवा की व्यवस्था अच्छी प्रकार कर दी । चातुर्मास सत्संग का कार्यक्रम आरंभ हो गया । प्रात: दादूवाणी की कथा, मध्य दिन में उपनिषद् आदि पर विद्वान् संतों के भाषण होने लगे । सायंकाल आरती, नाम संकीर्तन, पद गायन आदि सब अपने- अपने समय पर होने लगे । सीकर की जनता सप्रेम सत्संग करने लगे ।
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आचार्य उदयराम जी महाराज के दादूवाणी के प्रवचन से जनता अति प्रभावित होती थी । श्रवण करते हुये श्रोताओं को तृप्ति होती ही नहीं थी । इच्छा रहती थी कि सुनते ही रहें किन्तु प्रवचन तो नियत समय पर समाप्त हो ही जाता था । तब दूसरे दिन आकर श्रवण करेंगे यह आशा लेकर उठ जाते थे । इस सीकर के चातुर्मास में सत्संग बहुत अच्छा रहा ।
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वियाणी भक्तों ने संतों की सेवा भी श्लाघनीय की । नगर के सत्संगी, धनी, मानी सज्जनों ने भी रसोई आदि की अच्छी सेवा की । यह चातुर्मास सभी प्रकार अच्छा हुआ । समाप्ति पर वियाणी भक्तों ने आचार्य जी को मर्यादानुसार भेंट और संतों को वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया । आचार्य जी शिष्य संत मंडल के सहित नारायणा दादूधाम में पधार गये । फिर मारवाड की रामत की ।
(क्रमशः)

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