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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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ब्रह्मलीन होना ~
वि. सं. १९३१ आश्विन कृष्णा १० सोमवार को १८ वर्ष १० मास २७ दिन गद्दी पर विराज कर आचार्य उदयराम जी महाराज ब्रह्मलीन हुये थे । आपने- अपने समय में समाज का अच्छा संचालन किया था । आपके समय में समाज में सुखशांति की वृद्धि के साथ- साथ समाज की संख्या की भी वृद्धि हुई थी ।
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दादूवाणी का प्रचार भी आपने अच्छा किया था । आप अपने कर्तव्य का सुन्दर रुप से पालन करके ही ब्रह्मलीन हुये थे । आपकी चरण स्थापना पर १९२६०) रु. पूजार्थ साधुओं को वितरण किये गये थे ।
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गुण गाथा ~
उदयराम आचार्य जी, थे शुभ गुण की खान ।
ऐसा ही उनके लिये, कहते संत सुजान ॥१॥
उदयराम के वचन में, आकर्षण सु विशेष ।
था सु प्रभावित होत थी, उनसे सभा अशेष ॥२॥
इससे दादू वाणी का, उनसे हुआ प्रचार ।
देश विदेशों में भले, सुखी हुये सब धार ॥३॥
परमार्थ रु व्यवहार में, अधिक कुशल थे आप ।
अपने युक्ति प्रमाण से, हरते पर की ताप ॥४॥
उदयराम आचार्य से, फूला फला समाज ।
वे विशेष रखते रहे, शरणागत की लाज ॥५॥
उदयराम उपकार में, सदा बढाते हाथ ।
इस कारण ही सर्व मिल, देते उनको साथ ॥६॥
दादूवाणी की कथा, करते परम ललाम ।
उनसे सुनना चाहते, नर नारी सब धाम ॥७॥
संत रु सेवक सभी से, उदयराम का स्नेह ।
था उनको सब चाहते, ले जाना निज गेह ॥८॥
संतों की महिमा अमित, कौन पासके पार ।
‘नारायणा’ इस से करे, वन्दन बारंबार ॥९॥
इति श्री एकादश अध्याय समाप्त:
(क्रमशः)

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