शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

बीकानेर से टीका की भेंट ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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बीकानेर से टीका की भेंट ~ 
वि. सं. १९१८ में ही बीकानेर नरेश की ओर से- घोडा, चान्दी की छडी, दुशाला आदि टीका का दस्तूर तथा नरेश की ओर से आचार्य जी के नाम सम्मान सूचक पत्र आया । आचार्यजी ने भेंट स्वीकार करके नारायणा दादूधाम दादूद्वारे का प्रसाद बीकानेर नरेश को भेज दिया ।
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विसनदासजी के चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९१९ में विसनदासजी उदयपुर जमात वालों का चातुर्मास निश्‍चित हुआ । विसनदासजी ने नारायणा दादूधाम के मेले में महाराज उदयरामजी का चातुर्मास मनाकर सब जमातों के महन्त संतों को भी चातुर्मास का निमंत्रण प्रेम सहित दिया और अपने स्थान में जाकर चातुर्मास के लिये बहुत अच्छी तैयारी की । 
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आचार्य उदयरामजी महाराज का सामेला आषाढ शुक्ला नौमी का निश्‍चय किया गया । आचार्य जी तथा सब महन्त संतों को या सूचना दी गई । अन्य महन्त संतों के पत्रों में यह भी प्रार्थना लिखी गई कि आप लोग आषाढ शुक्ला ७-८ को ही उदयपुर जमात में पधारने की कृपा करें जिससे आचार्य जी का सामेला हम सब मिलकर कर सकें । 
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प्रार्थनानुसार महन्त संत नियत समय पर पधार गये । महन्तों के सामेले करके उनको नियत स्थानों पर ठहराया गया । इधर आचार्यजी भी आ गये । उनको उदयपुर नगर से परे ही ठहराया गया । आषाढ शुक्ला ९ मी को प्रात: ही उदयपुर जमात ने तथा आगत महन्त संतों ने आचार्य जी के सामेला की तैयारी की, हाथी को सजाया गया, निशान, नौबत, नगाडे ऊंटों पर जंबूरे रखे गये । 
शस्त्र कला में निगुण नागे जिनको खंडेत कहा जाता था । वे हनुमान जी के समान कच्छा पहनकर अपने अपने प्रदर्शन के शस्त्र लेकर तैयार हो गये । अन्य नागे संतों ने अपने अपने कंधों में तलवारें लटकाईं । एक हाथ में श्‍वेत चंदन की बनी हुई सुमिरनिये और दूसरे हाथ में भाले उठाये । विरक्त संतों ने एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में दंड लिये । गायक संतों ने अपने वाद्य लिये । इस प्रकार सबने तैयारी कर ली तब इस यूथ को क्रमबद्ध बनाया गया । 
(क्रमशः)

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