शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

नाभा गमन ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
.
१४ आचार्य गुलाबदासजी
.
नाभा गमन ~ 
आचार्य गुलाबदासजी पटियाला से विदा होकर शिष्य संत मंडल के सहित विरचते हुये नाभा के पास पधारे तब आचार्य गुलाबदासजी महाराज ने अपने आने की सूचना नाभा नरेश हीरासिंहजी को दी । सूचना मिलने पर अपनी कुल परंपरा के अनुसार राजा हीरासिंहजी राजकीय लवाजमा तथा भक्त मंडल के सहित बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये आचार्य गुलाबदासजी की अगवानी करने आये । 
.
मर्यादानुसार भेंट चढा, प्रणामकर के आवश्यक  प्रश्‍नोत्तर शिष्टाचार के पश्‍चात् आचार्य गुलाबदासजी महाराज को अति सत्कार से संकीर्तन करते हुये नगर में ले गये और नगर के मुख्य बाजार से ले जाकर नियत स्थान पर ठहराया । राजा हीरासिंहजी ने संत सेवा का अच्छा प्रबन्ध कर दिया । यहां भी कुछ दिन अच्छा सत्संग रहा और आचार्य गुलाबदासजी महाराज पधारने लगे तब राजा प्रजा ने सस्नेह भेंट देकर विदा किया ।  
.
जीन्द राजा द्वारा सम्मान ~ 
नाभा से विदा होकर आचार्य गुलाबदासजी महाराज अपने शिष्य संत मंडल के सहित विचरते हुये जीन्द राज्य की राजधानी के पास आये तब अपनी मर्यादानुसार जीन्द नरेश रघुवीरसिंहजी को अपने आने की सूचना दी । 
.
तब राजा रघुवीरसिंहजी अपनी को कुल मर्यादा के अनुसार राजकीय लवाजमा तथा भक्त मंडल के सहित बाजे गाजे के साथ संकीर्तन करते हुये आचार्य गुलाबदासजी महाराज की अगवानी करने गये । मर्यादापूर्वक भेंट चढा, प्रणामादि शिष्टाचार के पश्‍चात् अति सत्कार से संकीर्तन करते हुये नगर के मुख्य बाजार से ले जाकर नियत स्थान पर ठहराया । 
.
सेवा का प्रबन्ध कर दिया गया । आचार्य गुलाबदासजी महाराज वहां ठहरे तब तक राजा, राजपरिवार तथा जनता ने सत्संग का आनन्द प्राप्त किया । वहां से पधारने लगे तब राजा प्रजा ने सप्रेम भेंट देकर विदा किया । फिर आप भ्रमण करते हुये तथा धार्मिक  जनता को निर्गुण ब्रह्म की भक्ति का उपदेश करते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये । 
(क्रमशः) 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें