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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१४ आचार्य गुलाबदासजी
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निवाई में चातुर्मास ~
वि. सं. १९३२ के चातुर्मास का निमंत्रण आचार्य गुलाबदासजी महाराज को निवाई जमात के पंचों ने दिया । आचार्य जी ने स्वीकार कर लिया । फिर चातुर्मास का समय समीप आने पर आचार्य गुलाबदासजी महाराज अपने शिष्य संतों के सहित निवाई पधारे ।
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निवाई जमात के पंचों के सहित अब जमात- नौबत, निशान, जंबूरे, बाजा, सजे हुये खंडेत आदि के सहित संकीर्तन करते हुये आचार्य गुलाबदासजी महाराज का सामेला करने गये । साष्टांग दंडवत सत्यराम करके बडे ठाट बाट से बाजे गाजे व संकीर्तन करते हुये निवाई के मुख्य बाजार से चले । खंडेत अपनी शस्त्र कला का प्रदर्शन करते जा रहे थे । नगर के नर नारियों की दोनों ओर दर्शनों के लिये भीड लगी थी ।
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उक्त प्रकार नगर के नर नारियों को आचार्य जी के तथा संत मंडल के दर्शन कराते हुये शोभा यात्रा शनै: शनै: आगे बढ रही थी । नगर से निकल कर जमात में आये और नियत स्थान पर आचार्य जी को ठहराया । सेवा के लिये सेवक रख दिये गये । चातुर्मास का सत्संग आरंभ हो गया ।
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सत्संग के कार्यक्रम दोनों समय कथा, पद गायन, नाम संकीर्तन, आरती, ‘दादूराम’ मंत्र की ध्वनि आदि सब समय पर होने लगे । चातुर्मास अच्छा हुआ । समाप्ति पर आचार्य जी को मर्यादानुसार भेंट और सब को यथा- योग्य दस्तूर व संतों को वस्त्र देकर सस्नेह विदा किया ।
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मारवाड की रामत ~
निवाई का चातुर्मास करके आचार्य गुलाबदासजी महाराज नारायणा दादूधाम में पधार गये । फिर यहाँ से मारवाड की रामत के लिये प्रस्थान किया । मारवाड के निज समाज के साधुओं के स्थानों में तथा सेवकों में भ्रमण करते हुये उन्होंने दादूजी महाराज के रहस्यमय सिद्धांत एवं साधन समझाने का प्रयत्न किया तथा धार्मिक जनता को सत्संग द्वारा ईश्वर भक्ति में लगाने का कार्य करते रहे । बडे ग्रामों में अधिक ठहरते थे । व छोटे ग्रामों में कम ठहरते थे । उक्त प्रकार निर्गुण राम की भक्ति के संस्कार जमाने के लिये भ्रमण करते हुये पुन: नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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निर्माण कार्य ~
वि. सं. १९३१ में आचार्य गुलाबदासजी महाराज ने जयपुर में स्थान बनवाया था । वि. सं. १९३१ में ही नारायणा दादूधाम में श्री चैनरामजी महाराज की बारहदरी के आगे आचार्य गुलाबदासजी महाराज ने साईवान लगाया था जो अब तक विद्यमान है ।
(क्रमशः)

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