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🌷🙏 *卐सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷🙏 *#बखनांवाणी* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Ram Gopal Das*
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*सपने सब कुछ देखिये, जागे तो कुछ नांहि ।*
*ऐसा यहु संसार है, समझ देखि मन माँहि ॥*
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राग आसावरी ॥३॥उपदेश॥
मन रे चरणाँ ही चित राखि ।
पूजि परमानंद प्राणी, दूरि दुरमति नाखि ॥टेक॥
कलि कठिन उपाव को करि, नाऊँ लै निरबाहि ।
भजन करि नर भूलि जिनि जै, सबल सरणैं साहि ॥
समझि सोचि बिचारि जिय मैं, सुरति करि जिव जागि ।
लुबधि लालच लोभ तजि करि, पलटि चरणौं लागि ॥
आन सौं मति मोह बाँधै, भरमसी भरपूरि ।
काल पासी जीव जासी, राम रहसी दूरि ॥
हरि सुमिरि दुख हरण हिरदै, तरण तारण सोइ ।
बरणि बषनां नाऊँ निज तत, और नाहीं कोइ ॥४६॥
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मन = अंतःकरण की उपाधि वाले हे जीव ! अपनी चित्तवृत्ति को स्वात्मतत्त्व-चिंतन में ही लगाकर रख । हे प्राणी ! परमानन्द स्वरूप स्वात्मतत्त्व का बोध प्राप्त करने का प्रयत्न कर और दुर्मति = अविवेक को दूर कर डाल । कलिकाल अति कठिन समय है । इस कठिन समय में स्वात्मतत्त्व का बोध प्राप्त करने का कोई न कोई उपाय कर ।
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मेरी सम्मति में भगवन्नामजप करते हुए जीवन का निर्वाह करना सर्वोत्तम उपाय है । अतः हे मनुष्य ! भगवद्भजन कर । इसको किसी भी स्थिति में, किसी भी काल में और किसी भी देश में मत भूल और सर्वशक्तिशाली, परमैश्वर्यवान परब्रह्मपरमात्मा की शरण का आश्रय ले । मेरी सलाह को सुनकर उसे भलीप्रकार समझने का प्रयत्न कर ।
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समझने पर सोच = चिंतन कर, विचार = मनन कर, बार-बार स्मरण कर और हृदय में उतार ले । लुबधि = आसक्ति, लालच और लोभ का सर्वथा परित्याग कर दे और संसार में संलग्न चित्त के प्रवाह को संसार से उलटाकर परमात्माभिमुख कर ले । परमात्म-तत्वातिरिक्त अन्य किसी से भी राग मत कर, मोह मत बाँध, अन्यथा तू जन्म-जन्मान्तरों तक भ्रमता ही फिरेगा ।
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क्योंकि तेरे से मुक्ति प्रदान करने वाला राम तो दूर ही रह जायगा और अन्त समय में तेरा जीव काल द्वारा फाँसी में बांधकर शुभाशुभ कर्म-फल भुगताने को ले जाया जायेगा । अशेष दुःखों को हरण करने वाले हरि का स्मरण कर क्योंकि वह इस दुस्तर संसार-सागर से तारने वाला है । भगवन्नाम रूपी निजतत्त्व का ही वरण क्योंकि वरण करने योग्य और दूसरा कुछ है ही नहीं ॥४६॥
(क्रमशः)

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