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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१५ आचार्य हरजीराम जी ~
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उतराध की रामत ~
चान्दसीन चातुर्मास करके उतराधे संतों के आग्रह से आचार्य हरजीरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित उतराध की रामत करने पधारे । उतराध के स्थानधारी संतों तथा सेवकों का आतिथ्य ग्रहण करते हुये तथा दादूवाणी का उपदेश करते हुये उतराध में भ्रमण करने लगे ।
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फिर शनै: शनै: पटियाला के पास पहुँचे तब अपनी मर्यादा के अनुसार अपने आने की सूचना पटियाला नरेश को दी । सूचना मिलने पर पटियाला नरेश राजेन्द्रसिंहजी राजकीय लवाजमा लेकर आचार्य हरजीरामजी महाराज की अगवानी करने बडे ठाट बाट से आये ।
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पटियाला सत्संग ~
पटियाला नरेश राजेन्द्रसिंहजी ने आचार्य हरजीरामजी महाराज के पास जाकर भेंट चढाकर, प्रणाम की और सामने बैठ गये और आवश्यक प्रश्नोत्तर हो जाने के पश्चात् आचार्यजी को अति सत्कार से लेकर बाजे गाजे के साथ संकीर्तन करते हुये नगर में प्रवेश किया और नगर के मुख्य बाजार से जनता को आचार्यजी तथा संत मंडल का दर्शन कराते हुये नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया ।
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प्रसाद बांट कर शोभा यात्रा समाप्त की । फिर पटियाला में सत्संग आरंभ हो गया । प्रात: दादूवाणी की कथा, मध्यदिन में विद्वान् संतों के भाषण होने लगे । पटियाला की जनता ने सत्संग में बहुत रुचि दिखाई । ठीक समय पर आकर कथा श्रवण करते थे और मर्मवेधी प्रवचनों को सुनकर अपने मन को भगवदाकार बनाने में परिश्रम करते थे । जिज्ञासु अपनी शंकाओं का समाधान होने से अत्यन्त हर्षित होते थे ।
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गायक संतों द्वारा उच्चकोटि के संतों के पदों को सुनकर अति प्रभावित होते थे । पटियाला नरेश राजेन्द्रसिंहजी तथा राज परिवार के सत्संगी भी दादूवाणी की ज्ञान गरिमा से बहुत प्रभावित होते थे । उक्त प्रकार कुछ समय तक पटियाला में अच्छा सत्संग चला और आचार्यजी वहां से जाने लगे तब राजा राजेन्द्रसिंहजी ने तथा नगर के सत्संगी वर्ग ने आचार्यजी को अति सम्मान के साथ भेंट देकर सस्नेह विदा किया ।
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नाभा गमन ~
पटियाला से विदा होकर आचार्य हरजीरामजी महाराज नाभा नरेश हीरासिंहजी के निमंत्रण पर नाभा पधारे । आचार्य हरजीसिंहजी ने अपने आने की सूचना नाभा नरेश को दी । तब नाभा नरेश हीरासिंहजी राजकीय लवाजमा तथा भक्त मंडल के सहित संकीर्तन करते हुये आचार्य हरजीरामजी महाराज की अगवानी करने आये ।
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मर्यादा के अनुसार भेंट चढाकर प्रणाम की और आवश्यक प्रश्नोत्तर के पश्चात् बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये नगर में ले गये और नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया । सत्संग आरंभ हुआ । यहाँ की धार्मिक जनता ने भी सत्संग में अच्छी रुचि दिखाई । कुछ दिन नाभा में ठहरे फिर जाने लगे तब नाभा नरेश हीरासिंहजी तथा धार्मिक जनता ने आचार्य हरजीरामजी को मर्यादा पूर्वक भेंट देकर सस्नेह विदा किया । नाभा से ही विदा होकर आचार्य जीन्द नरेश रणवीरसिंहजी के निमंत्रण पर उनके यहाँ पधारे ।
(क्रमशः)

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