सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

कल्याणदासजी के चातुर्मास ~

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१४ आचार्य गुलाबदासजी
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कल्याणदासजी के चातुर्मास ~  
वि. सं. १९३४ के चातुर्मास का निमंत्रण आचार्य गुलाबदासजी महाराज को कल्याणदासजी ने दिया । आचार्य जी ने स्वीकार किया । चातुर्मास का समय आने पर अपने शिष्य संत मंडल के सहित आचार्य गुलाबदासजी महाराज कल्याणदासजी के चातुर्मास में विराजे । 
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चातुर्मास के कार्यक्रम कल्याणदासजी ने अच्छी प्रकार चलाये । आचार्यजी तथा संतों की अच्छी सेवा की । चातुर्मास समाप्ति पर मर्यादा के अनुसार आचार्यजी को भेंट तथा सब संतों को वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया ।  
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तुकोराव होल्कर का आगमन ~
वि. सं. १९३९ में इन्दौर के महाराजा तुकोरावजी होल्कर नारायणा दादूधाम के कर्मचारियों द्वारा उनका स्वागत कराया । कर्मचारी उनको मर्यादा के अनुसार मंदिर में ले गये । मंदिर में दर्शन करके तुकोरावजी ने चढावा किया । पुजारी ने प्रसाद दिया । मंदिर से भंडारी आदि उनको बारहदरी में आचार्य गुलाबदासजी महाराज के पास ले गये । 
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आचार्य गुलाबदासजी महाराज का दर्शन करके तुकोरावजी ने भेंट चढाकर प्रणाम किया और नम्रता पूर्वक हाथ जोडकर सामने बैठ गये । और सत्संग करते रहे । इधर तुकोरावजी के सहित उनके साथ के सज्जनों के ठहरने आदि का प्रबन्ध कर्मचारियों ने कर दिया । भोजन की व्यवस्था हो गई । तुकोरावजी ने इच्छानुसार आचार्य गुलाबदासजी महाराज से सत्संग किया और भोजन आदि से निवृत होकर उनकी इच्छानुसार ठहरे । पश्‍चात् आचार्यजी को प्रणाम करके तथा मंदिर में दर्शन करके चले गये ।  
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जमातों की रामत ~ 
वि. सं. १९३६ में निवाई तथा लालसोट जमातों की रामत की । रामत में बहुत आनन्द रहा । जमातों के साधुओं ने बहुत अच्छा - सामेला किया । बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये जमातों में ले गये । बहुत अच्छी रसोइयाँ दीं । मर्यादा के अनुसार भेंट दी और पधारने लगे तब अति श्रद्धा भाव से विदा किया ।  
(क्रमशः) 

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