बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

जीन्द नरेश द्वारा सत्कार ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१५ आचार्य हरजीराम जी ~ 
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जीन्द नरेश द्वारा सत्कार ~ 
जीन्द राज्य की राजधानी संगरुर के पास जाकर आचार्यजी ने अपने आने की सूचना दी । तब जीन्द नरेश रणवीरसिंहजी अपने राजकीय ठाट बाट से आचार्य हरजीरामजी की अगवानी करने आये । मर्यादा पूर्वक भेंट चढाकर प्रणामादि शिष्टाचार के पश्‍चात् बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये भक्त मंडल के साथ आचार्यजी को नगर में लाये 
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और नगर के मुख्य बाजार से नियत स्थान पर ले गये । वहाँ प्रसाद बाँटकर शोभायात्रा समाप्त कर दी । सत्संग भी होने लगा । संगरुर की जनता ने सत्संग में अच्छा भाग लिया । राजा रणवीरसिंहजी ने आचार्य हरजीरामजी का बहुत सत्कार किया । कुछ दिन वहाँ ठहर कर जाने लगे तब राजा प्रजा सभी ने सस्नेह भेंट देकर आचार्यजी को विदा किया ।
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फरीदकोट पधारना ~  
संगरुर से विदा होकर आचार्य हरजीरामजी फरीदकोट के राजा विक्रमसिंहजी के निमंत्रण पर फरीदकोट पधारे । तब फरीदकोट के नरेश विक्रमसिंहजी ने आचार्यजी की सम्मान सहित अगवानी करके अति सत्कार पूर्वक आचार्यजी को ठहराया और अच्छी सेवा की । 
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फिर वहाँ से जाने लगे तब राजा विक्रमसिंहजी तथा फरीदकोट की जनता ने आपको भेंट देकर अति सत्कार सहित विदा किया । उक्त प्रकार भ्रमण करके  आचार्य हरजीरामजी महाराज शनै: शनै: नारायणा दादूधाम की ओर चले और कुछ समय में नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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बुरहानपुर पधारना ~ 
वि. सं. १९५१ में बुरहानपुर के सेवकों के आग्रह से आचार्य हरजीरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित बुरहानपुर पधारे । बुरहानपुर के सेवकों ने बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये आकर आचार्यजी की अगवानी की  । मर्यादापूर्वक  भेंट प्रणाम सत्यराम आदि शिष्टाचार के पश्‍चात् बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये नगर में लाकर अच्छे स्थान पर ठहराया । 
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सेवा का सुन्दर प्रबन्ध कर दिया । सत्संग होने लगा । बुरहानपुर में आचार्यजी के सेवक तथा अन्य धार्मिक  जनता दादूवाणी के प्रवचनों से अति प्रभावित हुई । उन्हें प्रवचन श्रवण करने के समय परम सुख व परम शांति का अनुभव होता था । एक दिन एक सेवक के बच्चे का पेट बहुत दुखा था । आचार्यजी ने उसे दादूवाणी के आले का कौणा जल में डुबोकर दिया उससे दर्द मिट गया था । 
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बुरहानपुर में अच्छा सत्संग हुआ । कुछ दिन वहाँ ठहरकर आचार्यजी जब नारायणा दादूधाम के लिये प्रस्थान करने लगे तब वहां के सेवकों ने मर्यादानुसार भेंट देकर सस्नेह विदा किया । वहाँ से विदा होकर आचार्य हरजीरामजी महाराज नारायणा दादूधाम में पधार गये ।  
(क्रमशः) 

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