*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*५. गुरु-शिष्य निदान निर्णय का अंग ~ ३३/३६*
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सब हुन्नर संसार के, किन हुं किये करि याद ।
सो रज्जब किस काम का, अब दे सो उस्ताद ॥३३॥
३३-३५ में कहते हैं, ज्ञानोपदेश करे वही गुरु है - किसी ने संसार के सभी गुण-विद्यादि परिश्रम करके याद किये हों वे आज किस काम के हैं ? जो वर्तमान में अधिकारियों को देते हैं वे ही गुरु हैं ।
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*सब संतों के सत शबद, जिनमें अलख अभेव ।*
*अब समझावे जो जिसहिं, सो तिस का गुरु देव ॥३४॥*
सभी संतों के वे शब्द यथार्थ है, जिनमें मन इन्द्रियों का अविषय अद्वैत ब्रह्म अर्थ रूप से स्थित है किन्तु जिस को जो अब उन शब्दों को समझाता है वही गुरु है ।
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*तुपक१ पावक दारू गोली, कहीं कहीं सौं होय ।*
*पै रज्जब निर्दोष सब, मारे वैरी सोय ॥३५॥*
बंदूक१, अग्नि, बारूद, गोली कहाँ कहाँ से संग्रह होती है किन्तु उनके बनाने वाले सभी निर्दोष माने जाते हैं, जो बंदुक से गोली मारता है, वही शत्रु माना जाता है । वैसे ही गुरु, शब्द, युक्ति आदि कहाँ कहाँ से संग्रह करता है किन्तु उन शब्द और युक्ति के कारण पुरुष को गुरु न मानकर जो वर्तमान में उपदेश देता है उसे ही गुरु माना जाता है ।
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*षड् दर्शन के रँग रँगी, आतम जल ज्यों आय ।*
*रज्जब सद्गुरु सूर ज्यों, किरण कर्ष ले जाय ॥३६॥*
३६-३९ में सद्गुरु की विशेषता बता रहे हैं - जल किसी रंग में पड़कर रंगा जाता है तब सूर्य अपनी किरण से खेंच कर उसे रंग रहित कर देते हैं, वैसे ही जब जीवात्मा जोगी, जंगम, सेवड़े, बौद्ध, संन्यासी, शेख, इन ६ प्रकार के भेषधारियों के भेष मतादि आग्रह में फँस जाता है तब सद्गुरु ही उपदेश द्वारा उससे मुक्त करके ब्रह्म साक्षात्कार कराते हैं ।
(क्रमशः)

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