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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१४ आचार्य गुलाबदासजी
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हुक्मदासजी के चातुर्मास ~
वि. सं. १९३७ में ढीकोल्या के हुक्मदासजी ने आचार्य गुलाबदासजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण दिया था । आचार्य जी स्वीकार किया था । चातुर्मास का समय आने पर आचार्य गुलाबदासजी महाराज अपने शिष्य संत मंडल के सहित हुक्मदासजी के पधारे ।
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हुक्मदासजी ने शिष्य संत मंडल के सहित आचार्य गुलाबदासजी महाराज का सामेला बडे ठाट बाट से करके अपने स्थान पर ले गये । चातुर्मास आरंभ हो गया । चातुर्मास के सभी कार्यक्रम सुचारु रुप से चलने लगे । सत्संग अच्छा होने लगा । समाप्ति पर हुक्मदासजी ने मर्यादानुार आचार्य जी को भेंट दी और संतों को वस्त्र देकर सस्नेह सबको विदा किया ।
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जीन्द के नरेश के चातुर्मास ~
वि. सं. १९३८ में जीन्द नरेश रघुनाथसिंहजी ने आचार्य गुलाबदासजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण दिया । आचार्यजी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय समीप आने पर आचार्य गुलाबदासजी महाराज ने अपने शिष्य संत मंडल के साथ चातुर्मास के लिये नारायणा दादूधाम से प्रस्थान किया और जीन्द राज्य की राजधानी के पास पहुँचकर अपनी मर्यादा के अनुसार जीन्द नरेश को अपने आने की सूचना दी ।
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सूचना मिलने पर जीन्द नरेश को रघुनाथसिंह जी राजकीय लवाजमा तथा भक्त मंडल के सहित बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये आचार्य गुलाबदासजी महाराज की अगवानी करने आये । मर्यादा के अनुसार भेंट चढाकर प्रणाम किया । और आवश्यक प्रश्नोत्तर हो जाने के पश्चात् आचार्यजी को सवारी पर बैठाकर नगर के मुख्य बाजार से संकीर्तन करते हुये ले जाकर नियत स्थान पर ठहराया । सेवा का सब प्रबन्ध करा दिया ।
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चातुर्मास आरंभ हो गया । चातुर्मास के सभी कार्यक्रम सुचारु रुप से चलने लगे । दोनों समय सत्संग होने लगा । नगर के नर-नारी दर्शन करने तथा सत्संग करने आने लगे । राजा, राज परिवार, प्रजानन सत्संग में अति श्रद्धा भक्ति से आकर ज्ञान भक्ति रुप अमृत का पान करते थे ।
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आचार्य गुलाबदासजी महाराज का प्रवचन रुचि कर होने से जनता ठीक समय पर आ जाती थी । सत्संग की दृष्टि से यह चातुर्मास भी बहुत अच्छा हुआ । जीन्द राज्य के इस चातुर्मास में आचार्यजी गुलाबदासजी महाराज तथा सब सतों का ही अच्छा सत्कार हुआ चातुर्मास समाप्ति पर आचार्यजी को मर्यादानुसार भेंट तथा संतों को वस्त्रदि देकर सस्नेह सब को विदा किया ।
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उतराध की रामत ~
जीन्द राज्य से विदा होकर आचार्य गुलाबदासजी महाराज ने शिष्य संत मंडल के सहित उतराध की रामत की । उतराधे स्थानधारी साधुओं ने तथा सेवकों ने आचार्यजी का अच्छा स्वागत किया । आचार्यजी भी सबके हित का उपदेश देते हुये पोद्दार भक्तों के आग्रह से रामगढ शेखावटी की ओर आगे बढे ।
(क्रमशः)

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