🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*कबहूँ पावक कबहूँ पाणी, धर अम्बर गुण बाइ ।*
*कबहूँ कुंजर कबहूँ कीड़ी, नर पशुवा ह्वै जाइ ॥*
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*राम-नाम-विस्मरण-फल ॥*
मैं मद भागी राम न ध्यायौ ।
जनमि जनमि ताथैं दुख पायौ ॥टेक॥
चिड़ी कमेड़ि की जोनी दीन्हौं ।
सूकर स्वान कागलौ कीन्हौं ॥
जीव जँत कीन्हौं केती बारी ।
कबहूँ पुरिष कबहुँ भयौ नारी ॥
बहुत बार कियौ ढांढौ ढोर ।
कबहुँ न साध सदा भयौ चोर ॥
बहुत जोनि फिर्यौ हा हा हूँतौ ।
बषनां राम बिसार बिगूतौ ॥६७॥
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बषनांजी अधिकांश संसारी जीवों की ओर से कहते हैं, मैं भाग्यहीन हूँ कि मैंने रामजी का भजन-ध्यान नहीं किया और इसीलिये बार-बार जन्मकर व मरकर अनेकों दुख भुगते हैं । बुरे कर्म करने व रामभजन न करने के कारण परमात्मा ने कभी चिड़िया, कभी कमेड़ी = फाखता नामक पक्षी को योनि प्रदान की । कभी शूकर, कभी कूकर तो कभी काक बनाया ।
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जीव-जन्तु = पशु-पक्षी कितनी ही बार बनाया । कभी पुरुष तो कभी नारी बनाया । अनेकों बार ढांढौ-ढोर = पशु बनाया किन्तु मैं सदैव चौर ही बना रहा । कभी भी मैं साधु नहीं बना ।
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(जिस कार्य के लिये व्यक्ति को नियत किया जाये और वह उस कार्य को न करे तो वह व्यक्ति चौर कहलाता है । भगवान ने भजन करने के लिये मनुष्य देह दी है । भगवद्भजन न करके विषयभोग करना चौरी है । भजन करना साधु-सज्जन होने का लक्षण है ।) मैं अनेकों योनियों में मैं हाय-हाय करता भ्रमा क्योंकि मैं बषनां ने रामजी का विस्मरण कर दिया जिसके कारण मैं बिगूतौ = बर्बाद हुआ ॥६७॥

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