शुक्रवार, 13 मार्च 2026

*६. गुरु मुख कसौटी का अंग ~ ५/८*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*६. गुरु मुख कसौटी का अंग ~ ५/८*
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*कालबूत१ कसणी२ भई, सेवक साँठी३ जानि ।*
*रज्जब तावे४ तीरगर५, त्यों सद्गुरु की बानि६ ॥५॥*
जैसे तीर बनाने वाले५ साँचे१ से लोह शलाका२ वा लकडी३ को ठीक करके फिर उसे तपा तपा कर लक्ष्य वेधने योग्य बाण तैयार करता है वैसे ही सद्गुरु का स्वभाव६ है, वे साधन कष्ट से शिष्य को तपा४ तपा कर ब्रह्म प्राप्ति के योग्य बना देते हैं ।
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*प्राण पटहूँ उरतू१ करहि, झूठ सांच सा२ साद३ ।*
*दिवसा दे न दझाव हीं, धनि धनि गुरु उस्ताद ॥६॥*
वस्त्र पर उस्तरि१ करने वाला उस्तरि करता है तब वस्त्र साफ हो जाता है, वह२ सफाई ही उसको ठीक होने की निशानी३ है । उस्तरि करने वाला उस्ताद प्रतिदिन उस्तरि करता है किन्तु वस्त्र को जलाता नहीं, धन्य है उसे, वैसे ही गुरु ज्ञानाग्नि से युक्त सत्य उपदेश करते हैं और मिथ्या को भिन्न करके दिखा देते हैं, उपदेश का धारण करना है वही साधक के श्रेष्ठ बनाने का चिन्ह है गुरु प्रतिदिन उपदेश करते हैं किन्तु किसी के अन्तकरण को व्यथित नहीं करते, ऐसे गुरुदेव को बारम्बार धन्यवाद है ।
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*काया कद उरतू किया, गुरु उस्ताद हि ताय ।*
*शंकट में शोभा भई, नर देखहु निरताय ॥ ७॥*
उस्तरि करने वाला उस्ताद वस्त्र पर उस्तरि करता है तब देखो तपाने और दबाने रूप कष्ट से भी वस्त्र से शोभा बढ़ जाती है । वैसे ही गुरु प्रयत्न पूर्वक उपदेश द्वारा साधन कष्ट से साधक के शरीर को शुद्घ करते हैं । हे नरो ! विचार करके देखो, जिनकी भी शोभा हुई है, उनकी साघन कष्ट से ही हुई है ।
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*मन रुपा निर्मल भया, सद्गुरु सोनी हाट ।*
*रज्जब शीशे शब्द सौं, कटै कलंकी काट ॥८॥*
स्वर्णकार चाँदी के मैल को निकालने के लिये उसमें शीशा डालते हैं, शीशा चाँदी के कलंक रूप मैल को निकाल लाता है, इस प्रकार सोनी की हाट पर जाकर चाँदी निर्मल होती है । वैसे ही शिष्य का मन सद्गुरु के उपदेश से निर्मल होता है, सद्गुरु के शब्द मन के कलंक रूप मैल को निकाल देते हैं ।
(क्रमशः)

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