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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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समितियां ~
उत्सव की व्यवस्था के लिए सात समितियां बनाई गई थीं । १- स्वागत समिति । २- अतिथि भोजन व्यवस्था समिति । ३- बडे भंडार की व्यवस्था समिति । ४- सभा मंडप निर्माण स. । ५- परिषद् प्रबन्ध स. । ६- दादू वीर दल स. । ७- कार्यालय औषधालय स. । उक्त समितियों ने अपने- २ कार्य तत्परता से संभाल लिये थे ।
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उत्सव का आरंभ ~
उत्सव का समय वि. सं. २००० फा. शु. ५ से फा. शु. ११ तक एक सप्ताह का निश्चित किया था । कार्य संभालने वाले महानुभाव फा. शु. २-३ को ही नारायणा दादूधाम में आ गये थे । खुश्की रास्ते से आने वाले महात्मा भी चतुर्थी के प्रात: मध्यो तक नारायणा दादूधाम में आ गये थे । भैराणा से आने वाले चतुर्थी की शाम तक नारायणा दादूधाम में पहुँच गये थे ।
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जमात उदयपुर अपने पूरे लवाजमे के साथ आई थी । उसका हाथी, निशाण, जंबूरे, नौबत व कारखाना सब उदयपुर से खुश्की रास्ते से आये थे । जमात चानसेन, मोरडा, जमात लालसोट भी अपने- २ पूरे लवाजमे व तम्बू डेरों के साथ आई थी । इन्होंने अपने- २ तम्बू डेरे सभा मंडप के दक्षिण पश्मिोत्तर में लगाये थे । फा. शु. ४ को शाम को नारायणे ग्राम में एक नया नारायणा और निर्मित हो गया था । आस पास के गावों के दर्शक पंचमी का सामेला देखने बहुत अधिक संख्यामें आये थे । पंचमी को प्रात: आचार्य रामलाल जी महाराज के सामेले का आयोजन था ।
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सामेला ~
संपूर्ण जमातें अपने- २ लवाजमे के साथ सामेले में सम्मिलित हुई थीं । स्वामी गोपालजी व्यायामाचार्य दादू महाविद्यालय के छात्र मंडल को व्यायाम सामग्री से सुसज्जित करके लाये थे । जमात उदयपुर के हाथी पर निशाण था । आचार्य रामलालजी महाराज दूदू ठाकुर साहब के हाथी ऊपर सिंहासन पर विराजमान थे । घोडे, ऊंट, रथ, बहल आदि सैंक़डों सवारियों की कतार लगी हुई थी ।
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लगभग चार हजार साधुओं का समुदाय व लगभग दश हजार दर्शकों का समूह, सामेले में सम्मिलित था । प्रात: नौ बजे रवाना होकर करीब १ बजे आचार्य रामलाल जी महाराज बारहदरी पधारे थे । आचार्य जी का सामेला वैसे तो प्रतिवर्ष ही मेले के समय नारायणा में होता है पर देखने वाले कहते थे कि यह सामेला अभूतपूर्व है । इस प्रकार शांत व जन समूह सहित सामेला पचासों वर्षों में देखने में नहीं आया था ।
(क्रमशः)

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